Monday, 27 October 2014

बाल महोत्सव में बाल अभिव्यक्ति – “हिफ़ाजत मेरा हक़”

                    बाल महोत्सव में बाल अभिव्यक्ति – “हिफ़ाजत मेरा हक़”
 बाल पंचायत के बच्चों ने लघु नाटकों द्वारा बाल हकों की पैरवी में बुलन्द की अपनी आवाज.........
वाराणसी के मूलगादी कबीरचौरा मठ में विभिन्न बाल पंचायतों के प्रतिनिधि बच्चों ने बाल महोत्सव “हिफ़ाजत मेरा हक़” में लघु नाटकों के माध्यम से बाल श्रम, गुमशुदा बच्चों एवं बाल विवाह के मुद्दों पर अपनी प्रस्तुति देते हुए अपने बाल अधिकारों की पुरजोर पैरवी की | अपने नाटकों से जरिये इन बच्चों ने समाज को यह सोचने पर विवश किया कि बाल संरक्षण के कई कानूनों और विभिन्न सुरक्षा प्रणालियों के बाद आज भी बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा और विकास से दूर खुशहाल बचपन का सिर्फ सपना संजोये शोषण और यातना का शिकार हैं | जिसमें बच्चों  के सुरक्षा और संरक्षण के मुद्दे पर सवाल खड़ा किया गया |
हिफाजत मेरा हक – बाल महोत्सव का आयोजन मानवाधिकार जननिगरानी समिति (PVCHR) जनमित्र न्यास (JMN) द्वारा ग्लोबल फण्ड फॉर चिल्ड्रेन (GFC) एवं  सर दोराब जी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के सहयोग से किया गया | जिसमें वाराणसी जिले के विभिन्न ब्लाकों से वंचित व अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के कुल 38 बच्चों द्वारा तीन लघु नाटकों में गुमशुदा बच्चों के मुद्दे पर “खो गये हैं हम” बालश्रम के मुद्दे पर  “मेरा भी है बचपन” बालविवाह के मुद्दे पर “करनी थी पढाई हो गयी विदाई” के माध्यम से अधिकारों की पुरजोर पैरवी और अपने विचारों की अभिव्यक्ति की गयी | इन नाटकों में बच्चो ने उन समस्याओं और चुनौतियों को सामने उकेरने का प्रयास किया जिन वे और उनके जैसे दूसरे लाखों बच्चे रोजमर्रा की जिन्दगी में सामना करते हैं |
इन लघु नाटकों की रचना बच्चों ने पिछले तीन दिन के थियेटर कार्यशाला में श्री वाल्टर पीटर (पूर्व सदस्य, TIE, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) के निर्देशन में किया | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यशभारती सम्मान से सम्मानित सुप्रसिद्ध सरोद वादक पण्डित विकास महाराज जी रहे एवं विशिष्ट अतिथि आचार्य संत विवेकदास जी एवं सुश्री तीस्ता सीतलवाड़ रहीं | इस मौके पर बच्चों ने प्रतीकात्मक रूप पटाखों को पानी में डालकर दीपावली पर पटाखा नही जलाने का संकल्प लिया और सभी से यह अपील किया कि वे भी दीपावली पर दीप जलाकर दीवाली मनाएं पटखा जलाकर नही | महोत्सव में कुल उन्नीस (19) बाल पंचायतों से सैकड़ो बच्चे और उनके माता पिता सहित शहर के प्रबुध्दजनो ने बड़े उत्साह से भाग लिया और बाल सुरक्षा की पैरवी की |
 कार्यक्रम के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए श्रुति नागवंशी मैनेजिंग ट्रस्टी, ने कहा “बाल सुरक्षा की स्थिति उत्तर प्रदेश की भयावह स्थिति सामने लाता है | प्रदेश में गुमशुदा बच्चों, लिंग अनुपात, बाल श्रम, बाल विवाह, बाल यौन हिंसा की घटनाओ में दुसरे प्रदेशों से कंही अधिक है | हमें बाल संरक्षण के काम में लगे ढाचों व् व्यवस्थायों को मजबूत करते हुए , सभी हितधारकों के समन्वय और जवाबदेही को बढ़ावा देकर राज्य, जिला और समुदाय स्तर पर एक मजबूत निवारक और जवाबदेह बाल संरक्षण प्रणाली को बनाने, स्थापित करने मजबूत करने की जरूरत है |"
  मुख्य अतिथि पण्डित विकास महाराज जी ने कहाकि बच्चे ही देश का भविष्य हैं किन्तु वे जिन अमानवीय परिस्थितियों में जीने को बाध्य हैं इससे न केवल उन बच्चों का बचपन प्रभावित होता है बल्कि देश का भविष्य और विकास भी प्रभावित हो रहा है |             
विशिष्ट अतिथि सुश्री तीस्ता सीतलवाड़ ने कहाकि बाल अधिकारों के संरक्षण और सम्वर्धन के लिए सरकार के साथ ही समाज को बहुत समवेदनशीलता जबाबदारी के साथ काम करने की बेहद जरूरत है | इस अवसर पर मानवाधिकार जननिगरानी समिति के निदेशक डा. लेनिन रघुवंशी, इदरीश अंसारी सहित काशी विद्यापीठ समाजकार्य विभाग सुश्री भावना वर्मा, मुनिजा खान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुश्री. निरुपमा सिंह, जिला प्रोवेशन अधिकारी श्री प्रभात रंजन जी उपस्थित रहे |

  उत्तर प्रदेश में बाल सुरक्षा की स्थिति

·        2012 में दर्ज राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो (SCRB) के अनुसार कुल लापता 3879 बच्चों में  केवल 2310 बच्चे ही घर वापस आ पाये शेष 1569 बच्चे अभी भी लापता हैं |
·        2011 की जनगणना के अनुसार राज्य के कई जिलों में बच्चों का लिंग अनुपातबहुत कम रिकार्ड किया गया है
·        एनएसएसओ 2009-10 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 1775333 बाल श्रमिक है जो कि देश में सबसे अधिक संख्या है |
·        नेशनल अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) के 2011 के डेटा से पता चलता है कि बच्चों के प्रति अपराधों में 24% की वृद्धि हुई है |
·         शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जीवित जन्म में 70 मौते होती है जो रास्ट्रीय औसत 1000 जीवित में 52 मौतों की तुलना अधिक है |
·         50% लडकियों का विवाह 18 साल से कम उम्र में ही हो जाता है |
·        केवल उत्तर प्रदेश में लगभग 9 लाख बच्चे बालश्रम में लगे हैं |
कुछ विशेष और आवश्यक प्रयास जो सुरक्षा के लिए किये जाने चाहिए :

§  बच्चो को उत्पीड़न, हिंसा और शोषण से बचाने के लिए बच्चों के लिए एक सुरक्षात्मक वातावरण बनाया जाय |
§  सभी स्तरों पर बाल संरक्षण संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न स्तरों आईसीपीएस के तहतगांव, ब्लॉक एवं जिला बाल संरक्षण इकाइयों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम बनाए जाय और पदाधिकारियों के लिए अलग|
§  राज्य में लापता बच्चों के लिए संचालन प्रक्रिया के निर्माण का मानक सुनिश्चित किया जाय |
§  राज्य के सभी जिलों में एंटी मानव तस्करी सेल को सक्रिय किया जाय |
§  पूरे राज्य में पुलिस स्टेशन के लिए यह अनिवार्य किया जाय कि माननीय उच्च न्यायालय के दिशानिर्देश के अनुसार किसी भी बच्चे के लापता होने का अनिवार्य रजिस्टर बनाया जाय और और किशोरों की शिकायत को देखने के लिए एक विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की जाय,प्रत्येक लापता बच्चे की रिपोर्ट को प्राथमिकी (FIR) में परिवर्तित किया जाना चाहिए |
§  ICPS के मूल्यांकन पर जिला स्तर पर कमजोर परिवारों की पहचान की जाय और गैर संस्थागत देखभाल और पालक-देखभाल को प्रायोजित किया जाय |
§  उत्पीड़न, हिंसा और शोषण से बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी कानूनो का क्रियान्वयन हो; उदाहरण के लिए, बाल विवाह निषेश अधिनियम, 2006 का प्रभावी कार्यान्वयन; बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम, 1986; POCSO अधिनियम, 2012 आदि |











PVCHR: Satymev Jayate,TB,weaver and Shruti

PVCHR: Satymev Jayate,TB,weaver and Shruti: #Weaver issue linked with #TB and #hunger highlighted by #PVCHR and interview of #Shruti Nagvanshi telecasted in #Satyamev Jayate: ht...

काशी की दो बेटियों ने छेड़खानी और रेप के खिलाफ चलाया अनोखा अभियान

मानवाधिकारी जन निगरानी समिति की प्रमुख श्रुति नागवंशी ने बताया कि गांव की लड़कियं स्कूलों से दूर हो गई थी। दबंग लड़कों का आतंक था। याश्मीन और नंदिनी को उनके अधिकारों के बारे में गाइड किया गया और नए रास्ते का सृजन हुआ। आज ये लोग यौन हिंसा और बाल विवाह के खिलाफ अभियान छेड़ रही हैं, जो समाज के लिए एक मिसाल है।

सावित्री बाई फुले बाल पंचायत के सदस्यगण 


काशी की दो बेटियों ने छेड़खानी और रेप के खिलाफ चलाया अनोखा अभियान
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Wednesday, 13 August 2014

बाल सहभागिता की अवधारणा




        


































  बाल अधिकार से वंचित बच्चों के बीच बाल सहभागिता की अवधारणा को लेकर हम सभी लम्बे समय से कार्यरत हैं । हमारे द्वारा बाल सहभागिता के मदे्नजर बच्चों के बीच विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम संचालित किये जाते रहे हैं, जिससे बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी, उनका व्यक्तित्व विकास, बच्चों को अपनी सोच अपेक्षाओं को अभिव्यक्त करने के अवसरों में सहयोग मिलता रहा है । निश्चित रुप से इन कार्यक्रमों का सकारात्मक प्रभाव भी बच्चों पर पड़ा है। जिसके कई सफल उदाहरण हैं | जब बच्चों ने अपने अधिकार हनन को समझते हुए स्वंय आगे बढकर अपने अधिकारों के संरक्षण की पैरवी की है । ऐसे में हम वयस्कों कि जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि हम अपने बाल समूह के बच्चों को अपने विचारों कि अभिव्यक्ति का मंच और अवसर दें, जिससे उनकी सोच, अपेक्षाओं, समस्याओं, चुनौतियों से परिचित हो सकें और बच्चों के अनुकूल निति नियमों में बदलाव किये जाने पर विचार किये जाने कि पहल हो सके |

बच्चों में आत्मविश्वास का निर्माण, विश्लेष्णात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण, सृजनात्मकता, जिज्ञासा, मुद्दों पर सजगता, आपसी सहयोग, सामूहिकता का विचार और नेतृत्व के लिए हम सभी लगातार प्रयत्नशील हैं |

Tuesday, 5 August 2014

अन्ध विशवास के कारण टीकाकरण का वहिष्कार - पहल से परिणाम तक


1-     अन्ध विशवास के कारण टीकाकरण का वहिष्कार - पहल से परिणाम तक

वाराणसी जिले के ब्लाक हरहुआ के अन्तर्गत ग्रामसभा भठौली है, जिसमे लक्षित गाँव भैठौली मुस्लिम बस्ती है | इस गाँव में कुल परिवार संख्या 18 है जो मुस्लिम जाति के लोग हैं। जिसकी आवादी महिला, पुरूष व बच्चों की टोटल संख्या F 32 M 45 T 77  है। सभी 18 परिवार नाई व मजदूरी का काम करते हैं जिनकी आमदनी मासिक आय 1500 रूपये से लेकर 2 हजार रूपये तक है। इस गाँव में 0 से 18 वर्ष के कुल बच्चे 40 है। जिसमें F12 M 28 T 40 है।
बच्चों का उम्र
F
M
T
0-1
0
2
2
1-3
1
1
2
3-5
1
4
5
5-6
0
1
1
6-14
8
12
20
15-18
2
8
10
0 से 1 वर्ष तक कुल 2 बच्चे दिनांक 25/06/2014 तक है। टीकाकरण से जुड़े हैं।
एक माह पहले इस गाँव में कोई भी टीकाकरण नहीं करवा रहा और नहीं कोई टीकाकरण के बारे में कोई जानकारी ही लेना चा रहा था | बगल के बस्ती में जब टीकाकरण हो रहा था उस समय आशा एनम व आंगनवाडी कार्यकत्री ने गर्ववती महिला व बच्चों को टीका लगवाने के लिए बुलाने गयी | उस गाँव के लोगो ने टीकाकरण का वहिष्कार करते हुये कहा कि हम लोग अब टीकाकरण नहीं करवायेंगे | इस बात की जानकारी आशा एनम व आंगनवाडी कार्यकत्री ने JMN कार्यकर्ताओं को बताया और सहयोग माँगा कि समुदाय को टीकाकरण पर समझाने के लिए | JMN कार्यकर्ता गाँव में गए और जानकारी किये कि लोंग टीकाकरण का वहिष्कार क्यों कर रहे है जानकारी के माध्यम से पता चला कि बडागांव ब्लाक के लखमीपुर छिरिया गाँव में टीकाकरण से एक बच्चे कि मौत हो गयी जिसके कारण लोग डर के कारण टीकाकरण नहीं करवा रहे है | इस घटना की सत्यता जानने के लिए तुरन्त बडागाव ब्लाक के कार्यकर्ता मंगलाजी से जानकारी लिए | मंगला जी द्वारा बताया गया कि इस बच्चे कि मौत टीकाकरण से नहीं हुयी | इस बच्चे के माँ ने गलत तरीके से दूध पिलाया दूध पिलाने के बाद जो प्रकिया माँ को करनी चाहिए वह उसने नहीं किया बच्चे को उल्टी हुआ जो कि दूध का हिस्सा बच्चे के श्वास नाली में उल्टा चला गया जिसके कारण बच्चे कि मौत हो गयी | इस जानकारी को भैठौली गाँव में बताया गया साथ में टीकाकरण से बच्चे को क्या फायदे है व टीकाकरण न करवाने से क्या खतरे है आदि जानकारियाँ दी गयी | काफी बहस के बाद समुद्दय का एक निर्यय पर पहुँचे और गाँव के सभी लोगो ने अपनी सोच को बदलते हुए पुन: टीकाकरण लगवाने के लिए तैयार हुए | इसके बाद आशा एनम को बुलवाकर बच्चों को टीकाकरण करवाया गया | अब समुदाय के तरफ से कोई विरोध नहीं है |
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2-     भेद-भाव के कारण टीकाकरण से वंचित समुदाय
वाराणसी जिले के ब्लाक हरहुआ के अन्तर्गत ग्रामसभा आयर में ब्राह्मण, क्षत्रि, प्रजापति, मौर्या, राजभर, पटेल, लाल, यादव, मुस्लिम, चमार व मुसहर जाति के लोग निवास करते हैं। उक्त ग्राम सभा की दूरी जिला मुख्यालय से 12 किमी तथा ब्लाक मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूरी पर है। आयर गाँव की कुल आबादी लगभग 6 हजार के आस-पास है। जिसमें आयर मुसहर बस्ती का 41 परिवार ग्राम सभा शिवरामपुर के सीमा से लगा हुआ है। उक्त बस्ती में आँगनबाड़ी केन्द्र  जन मित्र न्यास द्वारा निर्मित भवन में चलता है |
आयर मुसहर गाव की कुल जनसंख्या 170 है। F79 M91 M 170  है। उक्त गाव की महिला पुरूष में 7 परिवार ईंट भट्ठा पर ईटा पाथते हैं तथा कुछ परिवार रिक्शा चलाते हैं। कुछ परिवार तीसरी खेती का काम करते हैं। कुछ एकल महिला दोना पत्तल बनाकर अपना आजिविका चलाती है। चावल के समय पंजाब जाकर चावल बटोरने का काम करती है। तथा कुछ लोग भीख मागकर अपना आजिविका चलाते हैं। एक महिने में प्रत्येक परिवार की कुल आमदनी 15 सौ से लेकर 25 सौ है।
इस गाँव में 0 से 18 वर्ष के कुल बच्चे 82  है। जिसमें F 31  M51  है।
बच्चों का उम्र
F
M
T
0-1
1
5
6
1-3
2
5
7
3-5
6
5
11
6-14
21
27
48
15-18
1
9
10

एनम के माइक्रोप्लान के अनुसार टीकाकरण आयर मुसहर बस्ती में ही होना था  में होना था लेकिन एनम इस मुसाहर बस्ती में टीकाकरण गम्भीरता से नहीं करती थी वही दूसरे टोले में यही एनम पूरा समय देकर नियमित टीकाकरण करती थी | इस बस्ती में एनम, आशा व आंगनवाडी कार्यकती द्वारा टीकाकरण पर कोई प्रक्रिया नहीं चलाई गयी | इस मामले को phc अधीक्षक, CMO को लिखित शिकायत हुआ | शिकायत के बाद कोई कार्यवाही नहीं हुयी तो इसी मामले को NHRC,NCPCR को भेजा गया जिसकी जाँच हुयी | जाँच के बाद एनम मुसहर बस्ती में नियमित टीकाकरण करती है जिसकी मानिटरिंग phc से LHB आती है | इसी मुसहर गाँव में टीकाकरण कराने के लिए दुसरे जाती व गाँव के लोग  आते है |
टीकाकरण के लिए ए.एन.एम. आशा सुपरवाइजर खुद आकर बस्ती में बच्चों, गर्भवती, महिलाओं का अपने देखरेख में टीकाकरण करती है।




0 से 1 वर्ष के सभी 6 बच्चे टीकाकरण से जुड़़े हैं और 2 गर्भवती महिलायें भी हैं जो टीकाकरण से जूड़ी हैं।











Thursday, 10 July 2014

विद्यालय से ड्राप आउट बच्चों के नामांकन व नियमित विद्यालय आने के लिए निकाली गयी रैली |













विद्यालय से ड्राप आउट बच्चों के नामांकन व नियमित विद्यालय आने के लिए निकाली गयी रैली |

वाराणसी 10 जुलाई 2014 जिले के सरायमोहाना गाँव के सरकारी प्राथामिक विद्यालय द्वारा बच्चों के नामांकन व नियमित विद्यालय आने के लिए क्षेत्र के हर गलियारों में जागरूक करने के लिए रैली निकली | इस रैली का नेतृत्व ग्राम प्रधान, विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री मती रजिया सुल्तान, विद्यालय प्रवंधन समिति के अध्यक्ष आर.के. सहानी व मानवाधिकार जननिगारानी समिति के सद्यो ने किया | रैली में समिति के समिति केकार्यकर्ताओं ने सास्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति किये – हम जाते है स्कूल,क्योकि वंहा पढ़ाई होती खूब , हर बच्चे का है अधिकार रोटी खेल पढाई प्यार इस तरह के गीत व नारे रैली में गूंजते रहे जिसको देखने के लिए गाँव के लोग अपने काम छोड़ कर रैली का उत्साह को बढ़ाया | इस रैली के बाद सभा का आयोजन हुआ जिसमे सर्व प्रथम विद्यालय प्रवंधन समिति के अध्यक्ष आर.के. सहानी ने अपने सम्बोधन का कहा “ आज हर एक बच्चा देश के लिए महत्वपूर्ण है अगर देश को आगे बढाना है तो बच्चों को नियमित स्कूल आना होगा |” ग्रामप्रधान पति सम्भू निषाद ने कहा “ अगर सभी माता-पिता यह सोच की ही हमें अपने बच्चे को पढ़ाना है तो निश्चित ही पूरा गाँव शिक्षित हो जाएगा” , मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रतिमा पाण्डेयजी ने अपने संबोधन में बच्चों के लिए कहा कि अगर सभी बच्चे अपने –अपने दोस्तों को स्कूल लेकर आये तो आने वाले समय में हमारा देश साक्षरता में सबसे आगे रहेगा | सभा का समापन करते हुये विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री मती रजिया सुल्तान ने काहा कि आज जिस तरह का सहयोग अविभावको व सामाजिक संगठनो का मिला इसी तरह मिलता रहेगा तो देश का सभी परिषदीय विद्यालय में बच्चे दाखिला लेना शुरू कर देंगे और प्राइवेट विद्यालय का अस्तित्व अपने आप कम हो जाएगा | विद्यालय के बच्चो ने बाल अधिकारो पर चर्चा करते हुए व बाल अधिकार को संरक्षित करने के पहल पर सपथ लिया | बच्चों ने यह सपथ लिया की जो बच्चे रोज स्कूल नहीं आ रहे है हम उन बच्चो को अपने साथ लाने का प्रयास करेंगे दूसरा सपथ यह है कि बाल अधिकार को बचाए रखने हेतु हम पहल करेंगे
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सामिल रहे श्री मती रजिया सुल्तान (प्रधानाध्यापक ) , प्रताप नारायण सिंह ( साहयक अध्यापक ),अनुराधा (भार्गव सहायक अध्यापक) ,शकील अहमद ( साहयक अध्यापक ), सदगुरु शरण ( साहयक अध्यापक ), अनुपम गुप्ता ( साहयक अध्यापक ) , शशीप्रभा( साहयक अध्यापक ) , रीना कन्नौजिया( साहयक अध्यापक ) ,अशोक मिश्रा ( साहयक अध्यापक ) , विनोद यादव ( साहयक अध्यापक )हेमंत कुमार मौर्या ( साहयक अध्यापक ) अरविन्द कुमार यादव( साहयक अध्यापक ) , मधुलिका निषाद (शिक्षामित्र ), बीनू शर्मा ( शिक्षा मित्र ) ,विद्यालय प्रवंधन समिति के अध्यक्ष आर.के. सहानी प्रतिमा पाण्डेय, आनंद निषाद ,ब्रिजेश,राजेन्द्र प्रसाद ( सदस्य मनवाधिकार जन निगरानी समिति )