Monday, 1 August 2016

आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं संसाधनों की उपलब्धता की अध्ययन रिपोर्ट

सेवा में
श्रीमान् मुख्य विकास अधिकारी
वाराणसी उत्तर प्रदेश |

विषय- आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं संसाधनों की उपलब्धता के सन्दर्भ में 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों का अध्ययन रिपोर्ट एवं गुणवत्ता सुधार के सन्दर्भ में |
महोदय ,
            जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा वाराणसी के 4 ब्लाक (हरहुआ, बडागांव, पिंडरा, अराजीलाईन) एक एवं शहरी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र बजरडीहा के 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दी जा रही गुणवत्तापूर्ण सेवाओं एवं संसाधनो की उपलब्धता का एक संक्षिप्त अध्ययन किया गया है | अध्ययन प्रश्नावली महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दी जा रही मानक सूचकांक सेवाओं एवं गुणवत्ता को केंद्र रखकर बनाया गया है | अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र में जंहा एक तरफ गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच का प्रतिशत कुछ बेहतर दिखाई दे रहा है, वंही केन्द्रों में बुनियादी संसाधनो का बड़े स्तर पर आभाव है | इन बुनियादी संसाधनो के आभाव में हम बेहतर परिणाम की अपेक्षा नही किया जा सकता है | यह भी विचारणीय बिन्दु है कि जब वाराणसी के सिर्फ 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति चिंताजनक जन्हा बुनियादी संसाधनों का आभाव है तो कई सौ अन्य आंगनबाड़ी की स्थिति कैसी होगा और इन नाममात्र की सेवाओं के आधार पर बच्चों में कुपोषण कितना दूर हो पायेगा |
संसाधनों के अभावों के दृष्टिगत निम्न बिंदु ---------
1. अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के बैठने के लिए दरी, टाटपट्टी, चटाई आदि की व्यवस्था की किया जाना चाहिए | इनके अभाव में बच्चे पोषाहार की बोरियों पर बैठाए जाते हैं |
2. अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के लिए खाना पकाने के बर्तन उपलब्ध नही हैं, जिसके अभाव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती अपने घर से खाना पका कर लाती हैं या खाना पकाने के लिए अपने नीजी बर्तनो का प्रयोग करतीं हैं | अत: विभाग द्वारा उन केन्दों पर बर्तनों की व्यवस्था की जानी चाहिए |
3. इसी प्रकार बच्चों को पोषाहार या पका हुआ खाना खाने के लिए अधिकांश केन्द्रों पर बर्तन कटोरी आदि की व्यवस्था नही है | कुछ केन्द्रों में टिफिन है लेकिन वह भी केन्द्र में नामाकिंत कुल बच्चों की संख्या के अनुसार नही है, ऐसी अवस्था में कार्यकर्ती उन टिफिन का भी प्रयोग नही कर पातीं हैं | अत: सभी केन्द्रों में बच्चों को खाने के लिए उपयुक्त आवश्यक संख्या में बर्तनों की व्यवस्था किया जाना चाहिए | अन्यथा विभाग द्वारा दिए जा रहे पोषाहार के दुरूपयोग को कम करते हुए बच्चों में पोषण स्तर का सुधार नही किया जाना व्यवहारिक नही है |
 4. इसी प्रकार केन्द्रों में आने वाले बच्चे पीने के पानी के लिए हैण्डपाइप के पानी का ही प्रयोग कर पाते हैं क्योंकि ग्राम स्तर पर दूसरा कोई विकल्प नही है, अत: समय - समय पर विभागीय प्रयास से उन हैण्डपाइपो के जल शुद्धता को मापा जाना चाहिए |
5. रिपोर्ट में जिन 14 केन्द्रों पर वजन मशीन उपलब्ध नही है उनमें वजन मशीन उपलब्ध कराया जाए, इसी प्रकार जिन केन्द्रों पर ग्रोथ चार्ट नही है वंहा ग्रोथ चार्ट उपलब्ध कराया जाए |
6. अधिकांश (30) केन्द्रों पर बच्चों की लम्बाई नापने के लिए टेप, एवं बांह नापने हेतु टेप की व्यवस्था किया जाना चाहिए जिससे बच्चों के सम्पूर्ण विकास को मापा जा सके |
7. जिन 21 आंगनबाड़ी केंद्र में रेफरल पर्ची नही वंहा रेफरल पर्ची की व्यवस्था अविलम्ब किया जाना चाहिए |
8. 33 आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के साफ सफाई और स्वच्छता व्यवहार के दृष्टिकोण से प्रयोग में आने वाले तौलिया, साबुन, शीशा, आदि की कोई व्यवस्था नही है | अत: स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम में बच्चों के स्वच्छता व्यवहार के लिए भी कार्यक्रम और बजट की व्यवस्था किया जाना चाहिए |
9. इसी प्रकार आंगनबाड़ी केन्द्रों का स्वयं का भवन नही होने से वे शौचालय विहीन भी हैं और साथ ही भोजन पकाने के लिए कक्ष नही है | इस अवस्था में गुणवत्तापूर्ण सेवाओं को उपलब्ध करा पाना एक बड़ी चुनौती है |
10. आंगनबाड़ी कार्यकर्तीयों द्वारा प्री प्राइमरी किट का प्रयोग भी नही होता दिखाई पड़ता है, क्योंकि  लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ती प्रतिदिन अपने रजिस्टर ही भरते दिखाई देती हैं | उनके पास समय शेष उपलब्ध नही होता कि वे बच्चों के साथ शैक्षिक प्रक्रिया संचालित करें |
11. इसी प्रकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा के सन्दर्भ में संचालित प्रक्रियाएं केवल रजिस्टर तक ही सिमित होते है यदि लाभार्थी समूह में इन सेवाओं की उपलब्धता का आंकलन विभाग द्वारा किया जाएगा तो स्वत: ही स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी | ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के दिन भी केवल टीकाकरण कार्यक्रम तक ही सिमित रह जाता है किन्तु रिपोर्ट और रजिस्टर में सभी सेवाएँ मानक और विभागीय निर्देशों के अनुरूप संचालित किए जाते हैं |

अत: श्रीमान जी से निवेदन है कि इस मामले को संज्ञान में लेते हुए इन बच्चों के लिए icds की सेवाये व कुपोषित बच्चों कि उचित देखभाल के लिए कार्यवाही करने कि कृपा करे  |

                                                       श्रुति

                                                        ( मैनेजिंग ट्रस्टी )
 ( मानवाधिकार जननिगरानी समिति )

                                                         मो. 09935599330



आंगनबाड़ी सेवाओं में गुणवत्ता पंहुच एवं संसाधनों की उपलब्धता की धरातलीय स्थिति

 बाल अधिकार के सरंक्षण एवं संबर्धन के उद्देश्य से मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा बाल अधिकार परियोजना क्षेत्र के 4 ब्लाक (बडागांव, पिंडरा, हरहुआ, अराजीलाइन ) व 1 शहरी क्षेत्र बजरडीहा में संचालित 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों में सेवाओं व संसाधनों की उपलब्धता की धरातलीय स्थिति  अध्ययन किया गया |
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, एवं विकास के उद्देश्य से समेकित बाल विकास योजना (ICDS) के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता, पंहुच, और संसाधनो की उपलब्धता की धरातलीय स्थिति की जानकारी के दृष्टिकोण से अध्ययन किया गया, जिससे धरातलीय स्थिति से अवगत होकर सेवाओं में गुणवत्ता सुधार एंव लाभार्धियो की पहुँच सेवाओं तक सुनिश्चित हो सके |
अध्ययन की प्रक्रिया – अध्ययन के एक चरण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती से केंद्र में संसाधनों की उपलब्धता के सन्दर्भ में प्रश्न पूछे गये एवं  दूसरे चरण में कार्यकर्ताओं द्वारा केन्द्रों का अवलोकन के आधार पर रिपोर्ट तैयार किया गया है | यह अध्ययन 34  आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के साथ किया गया है |
आंगनबाड़ी केंद्र की प्राथमिक सूचनाएं –
वाराणसी जिले के 4 ब्लाक व 1 शहरी बस्ती के आंगनवाडी केन्द्रों की प्रारम्भिक सूचानाये ( जनवरी 2016 )  :-

आंगनवाडी की  संख्या  
0-6 माह के कुल बच्चें

7 माह से 3 वर्ष के बच्चें

3 वर्ष से 6 वर्ष के कुल बच्चे
कुल किशोरी बालिकाये
कुल गर्भवती महिलाये
कुल धात्री माताये

कुल कुपोषित बच्चें
(SAM+MAM)

34
385
1729
1591
2399
313
375
299

आंगनबाड़ी केंद्र में संसाधनों की उपलब्धता – आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह से संसाधनो के आभाव में संचालित हैं, संसाधन विहीन केंद्र किस प्रकार बच्चों एवं महिलाओं के पोषण स्वास्थ्य एवं विकास में सहायक होंगे जब वे खुद ही संसाधन रूपी पोषण के आभाव में कुपोषण से ग्रस्त हैं जिसका विवरण निम्न है |
1-      
  आंगनवाडी केन्द्र संचालन स्थल :- वाराणसी के 4 ब्लाक (बडागांव, पिंडरा, हरहुआ, अराजीलाइन ) व 1 शहरी क्षेत्र बजरडीहा में संचालित 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों में केवल 7 केन्द्र विभागीय भवन में संचालित है, 4 केन्द्र पंचायत भवन में संचालित , 7 किराए के मकान में संचालित होता है | विपरीत परिस्थिति में ऐसे 8 केन्द्र संचालित है जो खुले जगह में चलता है ऐसे परिस्थितियों में कैसे बच्चे गर्मी सर्दी व जाड़े के मौसम में बैठते है |
  आंगनवाडी केन्द्र में बच्चों की बैठने की व्यवस्था :- परियोजना क्षेत्र में कुल 31 केन्द्रों में खुलने के समय देखा गया | 28 केन्द्रों में बच्चे पोषाहार की प्लास्टिक की बोरी पर बैठते है | 3 केन्द्रों पर बच्चे विभाग द्वारा दी गयी टाटपट्टी पर बैठते है और जिलाधिकारी महोदय के गोद लेने के बाद 2 केन्द्र ग्राम- आयर, ख़ास हरहुआ पर HDFC बैंक द्वारा दिया गया कुर्सी टेबल पर बैठते है और 1 केन्द्र ग्राम आयर मुसहर बस्ती हरहुआ पर 2008 में जनमित्र न्यस द्वारा दी गयी कुसी मेज पर बैठते है |

केन्द्र पर हाटकुक पकाने के लिए बर्तन की व्यवस्था :-  आंगनवाडी कार्यकत्री द्वारा केवल 9 ICDS केन्द्रों पर हाटकुक पकाने के लिए बर्तन की व्यवस्था  की होने की बात बतायी गयी  शेष 25 केन्द्रों पर बर्तन की कोई व्यवस्था नहीं है इन केन्द्रों पर आंगनवाडी कार्यकत्री अपने घर से हाटकुक पका कर लाती है या केन्द्र पर अपना निजी बर्तन का उपयोग करती है जो की व्यवहारिक नही है की इससे बच्चों को समुचित मात्रा में पोषाहार मिलता होगा | कार्यकत्री से पूछने से पता हुआ की विभाग द्वारा हम लोग को कोई बर्तन नहीं दिया गया है |

 
जिन केन्द्रों पर बर्तन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

कुआर
सुशीला देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी

दल्लीपुर
रीता देवी

रमईपुर
राजकुमारी

सराय मुग़ल
प्रेमलता

रमईपट्टी
गायत्री देवी

खरुआपर
विजय लक्ष्मी

रायतारा
अनीता देवी

मिराशाह
मीना कुमारी

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

भैठौली
शिप्रा सिंह

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय

पुआरी खुर्द
दुर्गावती देवी
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )

बजरडीहा
ज्योति मिश्रा

बजरडीहा
ममता मिश्र
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी

4-      पोषाहार खाने का बर्तन बच्चों की संख्या अनुसार :- 11 केन्द्रों पर बच्चों को हाट्कुक  खाने के लिए बर्तन की कोई भी व्यवस्था नहीं है | जब की 23 केन्द्रों पर बच्चों के लिए तो टिफिन है लेकिन बच्चों के संख्या अनुसार नहीं है कार्यकत्री इसका उपयोग नहीं करती है | इन केंद्र पर बच्चे कटोरी या थाली लेकर पोषाहार की आस में अपने घर से निकलते हैं यह मानवीय गरिमा को ठेस पहुचाने वाला व्यवहार है |



जिन केन्द्रों पर बच्चों के खाने के लिए बर्तन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

कुआर
सुशीला देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc

आयर
पूनम जायसवाल

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

भैठौली
शिप्रा सिंह

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )
 बच्चों के लिए पीने का पानी की व्यवस्था :- आंगनवाडी केन्द्रों में स्वच्छ पीने का पानी किसी भी केन्द्र पर नहीं है | 26 ऐसे केन्द्र है जँहा पर बच्चे हैण्डपम्प से पानी पीते है और केवल 2 ऐसे केन्द्र है जँहा पर HDFC बैंक द्वारा RO लगवाया गया है विदित हो कि आयर गाँव को  माननीय जिलाधिकारी महोदय द्वारा गोद लिया गया है | इसी तरह 2 केन्द्रों पर बच्चे ट्यूबेल पर जाकर पानी पीते है और 1 केन्द्र पर कार्यकत्री कुए से पानी लाकर बच्चों को पिलाती है और एक ऐसा केन्द्र है जो हरहुआ ब्लाक के पुआरी खुर्द ककरही व खसेरा चमार बस्ती के पंचायत भवन में संचालित केन्द्र जँहा पर बच्चों के लिए पानी पीने कि कोई व्यवस्था नहीं है |
6-      वजन नापने का मशीन :- बच्चों का वजन नापने के लिए केवल 20 केन्द्रों पर मशीन उपलब्ध है और सही अवस्था में है शेष 14 केन्द्रों पर मशीन खराब होने के कारण उपयोग में नहीं लाया जाता है | ऐसी अवस्था में बच्चो का वजन किस प्रकार सम्भव है किस प्रकार कार्यकर्ती बच्चों का ग्रोथ चार्ट बनाकर बच्चों के पोषण विकास की निगरानी करतीं हैं |
जिन केन्द्रों पर वजन मशीन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc

रमईपट्टी
उषा देवी

रमईपट्टी
गायत्री देवी

आयर
पूनम जायसवाल

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

भैठौली
शिप्रा सिंह

पुआरी खुर्द
श्रुति
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc

रमईपट्टी
उषा देवी












7-      बच्चों का ग्रोथ चार्ट ( प्रत्येक बच्चें का ) :- विभाग द्वारा यह एक अच्छा पहल है की प्रत्येक बच्चों का ग्रोथ चार्ट 30 केन्द्रों पर है केवल 4 ऐसे केन्द्र है जिनके पास ग्रोथ चार्ट नहीं है वह रजिस्टर पर दर्ज करती है |
जिन केन्द्रों पर ग्रोथ चार्ट उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc







8-      बच्चों की लम्बाई नापने हेतु टेप :- बच्चों की लम्बाई नापने के लिए सिर्फ 4 केन्द्रों पर टेप है शेष 30  केन्द्रों पर टेप है ही नहीं | इसी तरह बच्चों के बाह नापने हेतु मानक टेप भी केवल 3 केन्द्रों पर है | यह एक बड़ा प्रश्न है कि जिन केन्द्रों पर वजन नापने की मशीन, लम्बाई नापने का टेप व बाह नापने का टेप न हो उस केन्द्र के बच्चों का कैसे पोषण मैपिंग का निर्धारण होता होगा |
जिन केन्द्रों लम्बाई नापने हेतु टेप उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा

कुआर
सुशीला देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी

दल्लीपुर
रीता देवी

रमईपुर
राजकुमारी

रमईपट्टी
उषा देवी

सराय मुग़ल
प्रेमलता

रमईपट्टी
गायत्री देवी

खरुआपर
विजय लक्ष्मी

रायतारा
अनीता देवी

मिराशाह
मीना कुमारी
हरहुआ
आयर
संजू यादव

आयर
पूनम जायसवाल

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय

पुआरी खुर्द
श्रुति

पुआरी खुर्द
दुर्गावती देवी
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )

बजरडीहा
ममता मिश्र
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी

परमन्दापुर
गीतादेवी

सजोई
पुष्पा देवी




























9-      बच्चों की संदर्भन पर्ची ( रेफरल / पीली पर्ची  ):-  रेफरल की स्थिति भी चिंताजनक है | 13 केन्द्रों पर ही रेफरल पर्ची उपलब्ध है शेष 21 केन्द्रों पर रेफरल पर्ची नहीं है

जिन केन्द्रों पर रेफरल / पीली पर्ची  उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
 बडागांव
सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा

छिरिया
संजू देवी inc
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी

दल्लीपुर
रीता देवी

रमईपुर
राजकुमारी

सराय मुग़ल
प्रेमलता

रमईपट्टी
गायत्री देवी

रायतारा
अनीता देवी
हरहुआ
आयर
संजू यादव

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )

बजरडीहा
ममता मिश्र
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी

परमन्दापुर
गीतादेवी

सजोई
पुष्पा देवी

10-   मेडिसिन किट :- मेडिसिन किट के मामले में विभाग द्वारा यह अच्छा पहल है कि कुल 32 केन्द्रों पर बच्चों के प्राथमिक उपचार हेतु दवा उपलब्ध है केवल 2 ऐसे केन्द्र है जँहा पर किसी भी प्रकार का दवा नहीं है |
जिन केन्द्रों पर मेडिसिन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
 बडागांव
छिरिया
संजू देवी  ( इन्चार्ज )

आयर
पूनम जायसवाल






11-   पेट के कीड़े मारने की गोली , आयरन की गोली :- विभाग द्वारा यह भी एक अच्छा पहल है कि कुल 31 केन्द्रों पर पेट के कीड़े मारने की गोली , आयरन की गोली उपलब्ध है शेष 3 केन्द्र ऐसा है जँहा पर यह गोली नहीं है वह 3 केन्द्र यह है |
जिन केन्द्रों पर पेट के कीड़े मारने की गोली , आयरन की गोली उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
 बडागांव
छिरिया
संजू देवी inc

रमईपुर
राजकुमारी

आयर
पूनम जायसवाल
12-   तौलिया , साबुन ,आईना बच्चों के प्रयोग हेतु :- केवल 1 केन्द्रों प्राथमिक विद्यालय रमईपट्टी पिंडरा में संचालित उषादेवी के केन्द्र पर बच्चों के स्वच्छता के मामले पर तौलिया, साबुन, आईना उपलब्ध है शेष 33 केन्द्रों पर इस तरह की व्यवस्था नहीं है | जिससे बच्चों में साफ सफाई के प्रति चेतना पैदा किया जा सके |
13-    बच्चों के लिए शौचालय अलग-अलग :- 34 केन्द्रों में से मात्र एक केन्द्र पर शौचालय की व्यवस्था नही है केवल 1 केन्द्र प्राथमिक विद्यालय रमईपट्टी पिंडरा में संचालित उषादेवी के केन्द्र पर  शौचालय की व्यवस्था है |
14-    भोजन पकाने का कक्ष :- 4 केन्द्रों पर भोजन पकाने के लिए कक्ष है शेष 30 केन्द्रों पर कोई व्यवस्था नहीं है | इन केन्द्रों पर कार्यकत्री अपने घर से भोजन पका कर लाती है |
15-   प्री प्रामारी किट :-  बच्चों को स्कूल पूर्व “पूर्व प्राथमिक शिक्षा” के लिए अक्षर शब्द गीत कविता कहानी आदि कुल 30 केन्द्रों पर रखा है लेकिन इसका उपयोग कार्यकत्री नहीं करती है | बाकि 4 केन्द्रों पर यह सामाग्री है ही नहीं |
16-   पोषण एंव स्वास्थ्य शिक्षण सामाग्री :- महिलायों और किशोरियों के बीच बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य के लिए शिक्षा कार्यक्रम की सन्दर्भ सामग्री 26 केन्द्रों पर है और 8 केन्द्रों पर इस तरह की सामाग्री नहीं है एक तरफ लाभार्थी समुदाय के पास अपेक्षित और आवश्यक जानकारियां नही हैं तो दूसरी तरफ सेवा प्रदाताओं द्वारा कमजोर और एवं आधी अधूरी प्रकिया के कारण अति वंचित समुदायों के बीच कुपोषण, रुग्णता, शिशु बाल व मात्री मृत्यु दरों में कमी कैसे लायी जाएगी तथा लाभार्थी को जानकारी दिए जाने कि प्रक्रिया कैसे संचालित की जाती है |

17-   बच्चों के मध्यान भोजन का मीनू ( दीवाल लेखन ) :- 13 आंगनवाडी केन्द्रों पर मध्यान भोजन का मीनू लिखा है और 21 केन्द्रों में कुछ भी नहीं लिखा है |



18-   ग्राम स्वास्थ्य व पोषण दिवस :- विभाग की यह एक अच्छी पहल है की सभी केन्द्रों पर ग्राम स्वास्थ्य व पोषण दिवस मनाया जाता है |


आंगनवाडी केन्द्र का भ्रमण रिपोर्ट  
हरहुआ ब्लाक अंतर्गत आयर ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थति
वाराणसी जिले के हरहुआ ब्लाक अंतर्गत ग्राम आयर जिसमे कुपोषण उन्मूलन करने के लक्ष्य से जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा गोद लिया गया है |
1-        आयर ग्राम के नई बस्ती का आंगनबाड़ी केंद्र सब्जी मण्डी के करीब कृषि विभाग के कमरे में संचालित है | केंद्र में 0 – 6 माह के कुल 11 बच्चे, 7 माह से 3 वर्ष के कुल 58 बच्चे एवं 3 – 6 वर्ष के कुल 56 बच्चे नामांकित हैं सर्वे के अनुसार 66 किशोरियां, 12 गर्भवती महिलाएं, 11 धात्री महिलाएं तथा कुल 4 कुपोषित बच्चों की पहचान किया गया है | बजट के आभाव में हाट्कुक नियमित नही बनता है, कार्यकर्ती द्वारा गृह भ्रमण नही किया जाता है ना ही माताओं को स्वास्थ्य पोषण सम्बन्धी जानकारी दिया जाता है | प्रत्येक टीकाकरण के दिन लाभार्थी महिलाएं मण्डी परिषद के टिन शेड में इकठ्ठा होती हैं, लेकिन उन्हें पोषाहार देकर वापस कर दिया जाता है | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा कुपोषित बच्चों की पहचान वास्तविक रूप में नही की जाती है उनके द्वारा हमेशा ही कम से कम संख्या में बच्चों की पहचान करके रजिस्टर में केवल दर्ज कर लिया जाता है | कुपोषण से पीड़ित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र से प्राप्त सेवाओं एवं रेफरल सेवाओं की कोई जानकारी दी जाती है | जिसे पूर्व में कई बच्चे मृत्यु का शिकार भी हो गए हैं | जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा मार्च माह में बच्चों के वजन मैपिंग में कुल 13 कुपोषित बच्चों में 4 गम्भीर और 9 आंशिक कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है | 
2-       आयर ग्राम के मुस्लिम एवं चमार बस्ती के लिए आंगनबाड़ी केंद्र II, III वर्तमान में संकुल के भवन में एक साथ संचालित है, II की आंगनबाड़ी कार्यकर्ती किरन सिंह की बीमारी से मृत्यु हो जाने के कारण की मृत्यु के कारण III केंद्र से जोड़ दिया गया है जो उर्मिला सिंह द्वारा संचालित है | केंद्र में बच्चों का नामांकन तो अधिक है लेकिन बच्चों की उपस्थिति 10 से 12 की संख्या में ही रहता है | पोषाहार तो दिया जाता है लेकिन उसके खाने के लिए कोई सुझाव नही दिया जाता है | खास बस्ती में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े बच्चे की वजन मैपिंग में 23 कुपोषित बच्चे जिसमें  से 2 गम्भीर हैं और 21 आंशिक कुपोषित बच्चे हैं |
3-       आयर ग्राम के मुसहर बस्ती के लिए आंगनवाडी केन्द्र वर्तमान में जनमित्र न्यास संस्था के भवन में संचालित है यह केन्द्र पूनम जयसवाल व सहायिका सरिता देवी चलाती है | केंद्र में 0 – 6 माह के कुल 13 बच्चे, 7 माह से 3 वर्ष के कुल 58   बच्चे एवं 3 – 6 वर्ष के कुल 54 बच्चे नामांकित हैं सर्वे के अनुसार 22 किशोरियां, 8 गर्भवती महिलाएं, 13  धात्री महिलाएं तथा कुल 5 कुपोषित बच्चों की पहचान किया गया है | बजट के आभाव में हाट्कुक नियमित नही बनता है,कार्यकत्री पूनम जयसवाल केन्द्र पर नियमित नहीं आती केन्द्र सहायिका द्वारा ही चलता है और गृह भ्रमण भी कभी नहीं करती तथा गर्भवती महिला धात्री महिला व किशोरियों को पोषण सम्बंधित सुझाव नहीं देती है | कुपोषित बच्चों के मिलकर कभी भी पोषण स्वास्थ्य स्वच्छता के मुद्दे पर कोई सलाह नहीं देती | मातृ समिति की बैठक भी कभी नहीं होती |आयर ग्राम के मुसहर बस्ती में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा कुल 5 कुपोषित बच्चों की संख्या बताई गई, जबकि ठीक उसी समय जनमित्र न्यास की टीम द्वारा बच्चों का मैपिंग किया तो कुल 14 कुपोषित बच्चे मिले जिसमें से 5 अति गम्भीर और 9 आंशिक कुपोषित बच्चे रहे |   
हरहुआ ब्लाक अंतर्गत पुआरी खुर्द ग्राम

4-       पुआरी खुर्द ग्राम की ककरही व खसेहरा चमार बस्ती के लिए आंगनबाड़ी केंद्र लाभार्थी बच्चों के घर से 1.5 किमी दूरी पर संचालित है, जिसे बच्चे दूरी और खराब रास्ता होने के कारण केंद्र पर नही जा पाते हैं जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ती रास्ता खराब होने के ही कारण से बस्ती में नही आती हैं यह विचार करने की बात है कि, जब कार्यकर्ती व्यस्क होते हुए कार्यक्षेत्र में आने में अक्षम हैं तो बच्चे  केंद्र पर कैसे जा सकेंगे | बताया जाता है कि हाट्कुक बजट के आभाव में नियमित नही मिलता है, पीने के पानी की कुछ व्यवस्था नही है | 
पिंडरा ब्लाक अंतर्गत दल्लीपुर ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थति

5-       ग्राम पंचायत दल्लीपुर ग्राम मारूकडीह आंगनबाड़ी केन्द्र - पश्चिमपट्टी में चौरा माता मंन्दिर के सामने खुले  आसमान में पेड़ के नीचे संचालित होता हैं | जहॉ पर आगनबाड़ी कार्यकर्ती रीता देवी व सहायिका शीला देवी कार्यरत हैं आंगनबाड़ी केंद्र पर सहायिका केवल आस पास के बच्चों को बुलाकर लाती हैं लेकिन वही मारूकडीह मुसहर बस्ती की दूरी 1.5km होने के कारण मुसहर परिवार बच्चों के पहुच से दूर हैं इसलिए वे बच्चे आंगनबाड़ी की सेवा से वंचित रह जाते हैं |  केंद्र में 0-6 माह के 14 बच्चे ,7 माह से 3 वर्ष के 60 बच्चें  ,3-6 वर्ष के 45 बच्चे, कुल किशोरियॉ 75 ,कुल गर्भवती 4 ,कुल धात्री माता 14, और कुल कुपोषित बच्चें 3 पजीकृत हैं | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती मारूकडीह के बच्चों का आकडा़ अधूरा दर्ज की हैं | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती मात्री समिति का गठन नही की हैं ना ही उन्हें इस सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी हैं | इस केंद्र पर 15-20  बच्चों की उपस्थिति होती हैं जिनके बैठने के लिए पोषाहार की बोरियां सीलकर टाट वनाया गया हैं | यहॉ पर पोषाहार पकाने का बर्तन नही मिला हैं अपने निजी बैगुना व अन्य बर्तन में भोजन पकाती हैं | पोषाहार खाने का बर्तन 25 कटोरी मिला हैं जो की बच्चों की संख्या के अनुसार कम हैं लेकिन कटोरी बच्चों के उपयोग में नही हैं बच्चे घर से बर्तन लेकर आते हैं | पेयजल का साधन हैण्डपम्प हैं | यहॉ पर ट्रे, शाल्टर व बडी़ मशीन दोनों उपलब्ध हैं जो की ठीक स्थिति में हैं | ग्रोथ चार्ट प्रत्येक बच्चे का हैं भरा जाता हैं ,बच्चों की बाह नापने व लम्बाई नापने हेतु टेप उपलब्ध नही हैं |  पीली/ रेफरल पर्ची नही हैं | मेडिसीन किट, पेट में कीड़े मारने व आयरन की गोली मिला हैं |  तौलिया, साबुन, आईना, नही मिला हैं ,शौचालय व भोजन पकाने का कक्ष नहीं हैं भोजन आगनबाड़ी कार्यकर्ती अपने घर से बनवाकर लाती हैं | प्री प्राइमरी किट रंग,फल,फुल,जानवर,सब्जी,आकार,आदि चार्ट एव स्लेट पेन्सिल कविता कहानी की पुस्तकें है लेकिन आगनबाड़ी का भवन न होने के कारण चार्ट रखा पड़ा हैं केवल पुस्तक व स्लेट बच्चो के उपयोग में हैं | पोषण व स्वास्थ्य शिक्षण सामग्री पोस्टर चार्ट , फ्लिप बुक हैं | केंद्र खुले आसमान के नीचे संचालित होने के कारण बच्चों के मध्याह्न भोजन का मीनू दिवाल लेखन नहीं हैं | ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस दूसरे बुधवार को होता हैं |


6-       यह आगनवाड़ी केंद्र मिराशाह फकीर बस्ती में किराये के मकान में संचालित होता हैं । केंद्र में 0 – 6 माह के कुल 11 बच्चे, 7 माह से 3 वर्ष के कुल 52 बच्चे एवं 3 – 6 वर्ष के कुल 50 बच्चे नामांकित हैं सर्वे के अनुसार 4 गर्भवती महिलाएं, 11 धात्री महिलाएं तथा कुल 9  कुपोषित बच्चों की पहचान किया गया है | जबकि ठीक उसी समय जनमित्र न्यास की टीम द्वारा बच्चों का मैपिंग किया तो कुल 17 कुपोषित बच्चे मिले जिसमें से 8 अति गम्भीर और 9 आंशिक कुपोषित बच्चे रहे |   इस केन्द्र पर बच्चे पोषाहार की बोरी पर बैठते है | हाट्कुक बनाने की कोई भी व्यवस्था नहीं है | बच्चों की लम्बाई व बाह नापने के लिए टेप नहीं है | मध्याह्न भोजन का मीनू दिवाल लेखन नहीं हैं |  

बडागांव ब्लाक अंतर्गत खरावन ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थति


7-       खरावन लाखापुर मुसहर बस्ती के मिनी आंगनवाड़ी का सर्वे रिपोर्ट - इस आंगनवाड़ी केंद्र को संचालित करने हेतु शासकीय भवन नही है यहा का आंगनवाड़ी केंद्र परियोजना क्षेत्र के बाहर लगभग 500 मीटर दूर प्राथमिक विद्यालय खरावन बड़ागाँव वाराणसी में संचालित होता है इस प्राथमिक विद्यालय में कुल 03 आंगनवाड़ी केंद्र को संचालित होता है, यहा की आंगनवाड़ी कार्यकर्ती सरोजा देवी है । जिनके पास सहायिका नही है जो बच्चों को कभी बुलाकर केंद्र पर नही लाती है । यह आगनवाड़ी केंद्र पर अनियमित समय लगभग 10:00 बजे आती है तथा अनियमित समय लगभग 01:00 बजे तक केंद्र में रहती है । इनके केंद्र में पूर्व प्राथमिक ( 03-06 वर्ष ) के 34 बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र पंजीकृत है जिसमे से 3-4 बच्चे ही पुष्टाहार लेकर कुछ ही समय में वापस घर चले जाते है जिसके बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ती सरोजा देवी है दूसरे आंगनवाड़ी कार्यकर्ती के साथ बैठ कर घरेलू बात ( गप-सप ) करती है । पूर्व प्राथमिक के बच्चों को बैठने के लिये पुष्टाहार की खाली फ़टी गन्दी बोरियां सिलकर टाट-पट्टी बनाकर बच्चों को बैठाती है । आंगनवाड़ी कार्यकर्ती अपने कुर्सी पर बैठकर रजिस्टर में लिखने-पढ़ने ( बच्चों को बुलाने, गृह भरमण, स्वस्थ्य सलाह ) का सब काम कर डालती है । जिस काम में लिये केंद्र में रहती है वहा का कोई काम नही करती यहाँ तक की बच्चों की उपस्थित बच्चो कभी नाम बोलकर नही दर्ज नही करती । इस केंद्र में किसी प्रकार का कोई साबुन, तौलिया, कंघी, शीशा नही है बच्चे घर से साफ सुथरा आते है घर वापस गंदे होकर यहा से जाते है । बच्चों को खाने-पिने के लिये 10 गिलास, 08 टिफिन 01 कुकर है जिसे वह अपने घर में रखी है उसका अपने घर के उपयोग में लाती है, केंद्र में बच्चे केंद्र में बच्चे से 03 वर्ष के 35 बच्चे पंजीकृत है जिनमे से 00-05 वर्ष के 05 गंभीर, 18 आंशिक कुपोषण के शिकार व 49 सामान्य बच्चे है । इन सभी पात्र किशोरी, गर्भवती, धात्री एवं  07 माह से 03 वर्ष के बच्चों को शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक माह में 03 दिन निर्धारित दिनांक 05-15-25 को पुष्टाहार वितरण कर उसे खाने की विधियों की जानकारी देना व उनके अभ्यास में लाना है । लेकिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ती उपरोक्त पात्र बच्चों एव महिलाओ को किसी-किसी माह में 1-2 बार अपने घर से बर्तन लाते है तो उसमे अपना हार्डकुकड / पुष्टाहार बिना बर्तन को धोये उसी में हार्डकुकड / पुष्टाहार बच्चे खाते है । इस केंद्र में किसी प्रकार का कोई साबुन, तौलिया, कंघी, शीशा नही है बच्चे घर से साफ-सुथरे केंद्र पर आते है गंदे होकर वापस घर जाते हैं । इनके यहा छोटा-बड़ा मिलाकर 05 वजन मशीन है मगर सभी खराब होकर बंद पड़ा है जब इस वजन अभियान में बच्चों का वजन करना पड़ा तो दूसरे केंद्र से वजन मशीन लेकर अपने बच्चों का वजन की है ।






34 आंगनवाडी केन्द्रों की सूची
विकासखण्ड
ग्राम पंचायत
कार्यकत्री नाम  का नाम
संचालन स्थल





1
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी
कार्यकत्री के घर
2

सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा
खुला जगह
3

कुआर
सुशीला देवी
पंचायत भवन
4

छिरिया
संजू देवी
विभागीय भवन
5

छिरिया
संजू देवी इन्चार्ज
विभागीय भवन
6
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी
खुला जगह
7

दल्लीपुर
रीता देवी
धार्मिक स्थल
8

रमईपुर
राजकुमारी
किराए के भवन
9

रमईपट्टी
उषा देवी
विभागीय भवन
10

सराय मुग़ल
प्रेमलता
खुला जगह
11

रमईपट्टी
गायत्री देवी
पंचायत भवन
12

खरुआपर
विजय लक्ष्मी
विभागीय भवन
13

रायतारा
अनीता देवी
खुला जगह
14

मिराशाह
मीना कुमारी
किराए के भवन
15
हरहुआ
आयर
संजू यादव
विभागीय भवन
16

आयर
पूनम जायसवाल
JMN भवन
17

आयर
उर्मिला सिंह
विभागीय भवन
18

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )
विभागीय भवन
19

भैठौली
शिप्रा सिंह
प्राधान जी के घर
20

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव
पंचायत भवन
21

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा
दुसरे के घर में
22

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय
खुला जगह
23

पुआरी खुर्द
श्रुति
दुसरे के घर में
24

पुआरी खुर्द
दुर्गावती देवी
प्राथमिक विद्यालय
25
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )
किराए के भवन
26

बजरडीहा
ज्योति मिश्रा
किराए के भवन
27

बजरडीहा
ममता मिश्र
किराए के भवन
28
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह
खुला जगह
29

पुआरी कला
मंसा देवी
किराए के भवन
30

पुआरी कला
शीला देवी
खुला जगह
31
अराजीलाइन
परमन्दापुर
विन्दवासनी
पंचायत भवन
32

परमन्दापुर
सुनीता देवी
प्राथमिक विद्यालय
33

परमन्दापुर
गीतादेवी
किराए के भवन
34

सजोई
पुष्पा देवी
खुला जगह


मातृत्व शिशु स्वास्थ्य मुद्दे पर चुनौतियां एवं आपबीती

      मातृत्व शिशु स्वास्थ्य मुद्दे पर चुनौतियां एवं आपबीती इंटरफेस
             27 जुलाई 2016 कामेश हट होटल जगतगंज वाराणसी
    जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा चाइल्ड राइट्स एंड यू के सहयोग से

मातृ शिशु स्वास्थ्य मुद्दे पर चुनौतियां एवं आपबीती इंटरफेस 27 जुलाई 2016 को वाराणसी के जगतगंज स्थित कामेश हट होटल में जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति के द्वारा आयोजित किया गया | कार्यक्रम में परियोजना के लक्षित क्षेत्र से 49 महिलाएं 20 परुष 2 पीड़ित बच्चे (उम्र लगभग 10-11 वर्ष के बीच) एवं अन्य संस्थाएं, मडिया, उच्च अधिकारीयों, विभाग प्रतिनिधि एवं संस्था से 40 कुल 106 लोगों की सहभागिता रही | कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. बी. बी. सिंह, संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डा. प्रसुन्न कुमार, श्री. शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय सुपरिटेंडेट डा. अरविन्द सिंह, राजकीय महिला चिकित्सालय डा. प्रियंका, काउंसलर सुश्री. सारिका चौरसिया, पंडित दीनदयाल मंडलीय चिकित्सालय डा. अनूप कुमार, प्रमुख रूप से शामिल हुए |
इस इंटरफेस का आयोजन सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य सेवाएं विशेषकर मातृत्व शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त करने में आने वाली समस्याओं एवं बाधाओं को स्वास्थ्य विभाग के साथ साझा करते हुए उन चुनौतियों को दूर करने की अपेक्षा से किया गया था | जिससे स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित महिलाओं एवं बच्चों को स्वास्थ्य सेवा उनके पहुंच में हो, उनमें आ रहे बाधाओं की पहचान करके उन्हें दूर किया जा सके |  मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारणों को दूर करते हुए एनीमिया, कुपोषण एवं बच्चों में रुग्णता की दर में कमी लाया जाए | वंचित समूह का सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर विश्वास बढ़े |
पैनल जिसमें स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारीयों, को स्वास्थ्य संस्थानों की चुनौतीपूर्ण स्थितियों, सुविधा एवं संसाधनो के अभावों, स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लापरवाही, दुर्व्यवहार एवं उपेक्षा की घटनाओं की शिकायत, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, इलाज में कर्ज लेने को बाध्य स्थितियां, मातृ के सोशल आडिट रिपोर्ट के छुपे हुए पक्ष को साझा किया गया | 19 प्रसव में अवैध धन उगाही, भेदभाव, सेवा नही दिए जाने की शिकायत, 2 बच्चों को चोट लगने की घटना में मंडलीय चिकित्सालय द्वारा लापरवाही, 12 मामले स्वास्थ्य संस्थानों में मानक अनुसार संसाधन एवं सेवाएं की कमी, 3 ग्राम में आशा की नियुक्ति की मांग कुल 32 वे मामले जिनमें पूर्व में सक्षम अधिकारीयों को शिकायत की गयी थी, उनकी फ़ाइल पैनल के समक्ष रखी गयी |   
सरकार द्वारा संचालित मातृत्व एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के मानकीकरण Maternal and Newborn Health Tookit के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों के वर्गीकरण Level 1 के 33 केन्द्र, Level 2 के 10 केन्द्र, Level 3 के 3 केन्द्र कुल 46 स्वास्थ्य केन्द्र की स्थितियों का आंकलन रिपोर्ट भी साझा किया गया ये केन्द्र अभी बहुत ही न्यूनतम सेवाएं जो बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति में है |
120 ईलाज में कर्जदारों परिवारों परिवारों का विश्लेषणात्मक अध्ययन साझा किया गया, जिसमें यह तथ्य उभरकर आया कि गरीब एवं वंचित समुदाय से सम्बध ये परिवार पहले सरकारी चिकित्सालय में ईलाज हेतु गए लेकिन संतोषजनक प्रभावी सेवा नही मिलने, उपेक्षा का शिकार होकर ग्रामीण क्षेत्र के गैर पंजीकृत प्राइवेट क्लिनिक में भारी कर्ज लेकर ईलाज करने को विवश हुए | ये प्राइवेट क्लिनिक वे हैं जिनके दक्षता का कोई भी प्रमाण उनके पास नही होता है | अधिकांश परिवार ईलाज में कोई असर नही होने पर झाड़फूंक भी करवाए | एक हजार से एक लाख पचहत्तर हजार तक की राशि प्रसव, आंत में सूजन, टीबी, टाइफाइड, चोट लगने जैसे घटनाओं में ईलाज और झाड़फूंक के लिए लेना पड़ा |
मातृ मृत्यु की 7 घटनाओं में मातृ मृत्यु सोशल आडिट की विभागीय प्रारूप के आधार पर संस्था द्वारा किए गए आडिट की रिपोर्ट रखी गयी | मातृ मृत्यु की इन सभी धटनाओं में डाक्टरों के अनुसार महिला की मृत्यु का प्रमुख कारण खून की कमी ही बताया गया | 7 में से 1 महिला की मत्यु मेडिकल कालेज में हुई उसे PHC से जानकारी और रेफरल सेवा नही मिली वह बसनी PHC पिंडरा PHC, जिला महिला चिकित्सालय होते हुए एम्बुलेंस ड्राइवर की सहायता से मेडिकल कालेज पहुंची | जिससे काफी समय बर्बाद हुआ | 4 महिलाएं जिनकी मृत्यु प्राइवेट हास्पिटल में हुई वे सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र से बिना प्रबन्धन किए यह कहकर वापस भेज दी गयी कि, प्रसूता गम्भीर स्थिति में है, उन्हें किसी प्राइवेट हास्पिटल में दिखाए | 2 महिलाएं जिनकी मृत्यु घर पर हुई वे भी सरकारी चिकित्सालय से वापस भेंज दी गयी थी | इन रिपोर्ट को स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से पैनल के सामने रखते हुए छुपे हुए कारणों को संज्ञान में लाया गया |
श्री शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय सुपरिटेंडेट डा. अरविन्द सिंह –  डा. अरविन्द सिंह ने उपस्थित समुदाय से कहाकि आपसे मैं यह गुजारिश करूंगा कि, आपको यदि किसी भी स्तर पर किसी स्वास्थ्य कर्मी या अन्य किसी से लापरवाही या अवैध वसूली शिकायत हो तो जरुर उस केन्द्र के मुखिया से उसकी शिकायत करें | किसी के बहकावे में कभी ना आएं, मै SSPG चिकित्सालय के 14 न० कमरे में बैठता हूँ कोई भी शिकायत हो तो आप मुझसे आकर शिकायत करें | आप केवल स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में ही नही बल्कि आपके जिन्दगी से जुड़े दुसरे मामलों में भी यदि कोई कर्मचारी आपका हक मारता हो तो आपको इसकी शिकायत करनी चाहिए |
संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डा. प्रसुन्न कुमार - डा. प्रसुन्न कुमार जी ने मातृत्व शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए, गर्भवती महिला की देखभाल के लिए परिवार को सचेत होने के लिए, लैंगिक दृष्टीकोण से अंतर ना किए जाने पर जोर देते हुए प्रेरित किया | Level 1 अंतर्गत आने वाले केन्द्रो में अभी मानक अनुसार व्यवस्थाएं नही हैं, उसके लिए और लापरवाह आशाओं के बीच सुधार का प्रयास जारी है |

राजकीय महिला जिला चिकित्सालय डा. प्रियंका – प्रियंका ने कहाकि मैं दुसरे किसी के बारे में कोई सफाई नही दे सकती हूँ लेकिन अपने बारे में आपको यह बता रही हूँ कि, मैं कभी भी लापरवाही नही करती हूँ | रेफरल केश का भी फालोअप करती हूँ जब तक वह महिला संस्थान में नही पहुंच जाती है | आपको कोई शिकायत हो आप अस्पताल प्रशासन से जरुर बताएं | अस्पताल परिसर में दलाल/ठग घूमते हैं उनके बहकावे में कभी नही आएं |
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. बी. बी. सिंह - डा. बी. बी. सिंह द्वारा फ़ाइल में लगे सभी केशो को पलटकर देखा गया और कुछ केशो को सुना भी गया | उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहाकि सबसे पहले तो मैं पीड़ितों ने जो केश बताए या मेरे सामने रखे गए मैं बतौर CMO उनकी कमियों को स्वीकार करता हूँ | और आपको आश्वासन देता हूँ कि मैं इनमे जाँच कराके अवश्य उचित कार्यवाही करूंगा | आपलोग तो एक तरह से हमारी मदद कर रहे हैं | स्वास्थ्य कर्मी लालच करते हैं प्रयास करके मैं धांधली रोकूंगा हम बदलाव का पूरा प्रयास करेंगे | जबकि सरकार हमें इतना तनख्वाह देती है कि, हम सरकारी लोग अच्छे से अपना परिवार चला सकते हैं | मैं बैठकों में स्वास्थ्य कर्मियों के व्यवहार में परिवर्तन लाऊंगा, | आपलोग निराश नही हों सरकारी योजनाओं से जुड़कर पूरा लाभ लें |
डा. मोहमद आरिफ – डा. आरिफ जी ने कहाकि संस्था द्वारा रखी गयी विश्लेषणात्मक रिपोर्टें बहुत ही तथ्यपरक और जमीनी हकीकत को सामने ला रही है | हम विश्लेषणों को समझकर यदि पहल करेंगे तो जरुर अच्छे परिणाम सामने आएँगे | आप सभी को भी एकजुट होकर स्वास्थ्य की दिशा में पहल करना होगा |
डा. लेनिन रघुवंशी –  जो भी सकारात्मक बदलाव हुए हैं उनसे प्रेरित होते हुए स्वास्थ्य केन्द्रों में मिलने वाली सुविधाओं को लेना चाहिए | क्योंकि आपकी ग्रामीण क्षेत्रों में जो डाक्टर डिस्पेंसरी खोलकर बैठे हैं वे असल में डाक्टर हैं ही नही उन्हें ईलाज और दवाओं का कोई ज्ञान नही होता हैं | वे आपके शरीर पर प्रयोग करते हैं और अपना झोला भरते हैं | स्वास्थ्य केन्द्रों की व्यवस्था को ठीक करना हम सब की जरूरत है वरना आप जिन क्षेत्रीय डाक्टर से अपना ईलाज कराते हैं वे रजिस्ट्रेशन, पर्चा, डिग्री और बोर्ड लगाए बिना ही डाक्टर बन गए है | आप ईलाज के लिए कर्ज में डूब रहे हैं | इसलिए जो सेवाएं हैं उन्हें लेंगे जो नही हैं उनकी मांग करेंगे और केन्द्रों में सुधार लाएंगे |  
सभी चिकित्साधिकारियों को ईलाज में कर्जदारों का विश्लेष्णात्मक अध्ययन, मातृ मृत्यु सोशल आडिट रिपोर्ट, ANM वर्कलोड मूल्यांकन रिपोर्ट, Maternal and Newborn Health Tookit के अनुसार स्थिति रिपोर्ट एवं सिफारिश सहित स्वास्थ्य अधिकार हनन के केश फ़ाइल दिया गया जिससे वे तमाम जमीनी हकीकत से वाकिफ होकर अपने स्तर से सुधारात्मक प्रयास करें |

कार्यक्रम का संचालन श्रुति नागवंशी, मातृ मृत्यु की सोशल आडिट रिपोर्ट मंगला प्रसाद द्वारा, ईलाज में कर्जदारों का विश्लेष्णात्मक अध्ययन को शोभनाथ द्वारा, ANM वर्कलोड मूल्यांकन रिपोर्ट आनन्द निषाद द्वारा, Maternal and Newborn Health Tookit के अनुसार स्थिति रिपोर्ट अनूप श्रीवास्तव द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन डाक्टर राजीव सिंह, ने दिया |    










                                                     

Friday, 4 December 2015

वार्ड ब्वाय बना वाराणसी के मण्डलीय अस्पताल का सर्जन जिसके कारण गवाना पड़ा यश को अपना एक पैर

वार्ड ब्वाय बना वाराणसी के मण्डलीय अस्पताल का सर्जन जिसके कारण गवाना पड़ा यश को अपना एक पैर
घटना का विवरण :
शंकर चौधरी और उसकी पत्नी सुनीता देवी, निवासिनी – मकान न० जे० 35/67, A – 18, A शैलपुत्री, नक्खीघाट जिला –वाराणसी की रहने वाली हैं | उनके पुत्र यश उर्फ़ आकाश चौधरी को 23 अगस्त, 2015 को  ट्राली से गंभीर चोट लग गयी| जिसके बाद यश को श्री शिवप्रसाद गुप्त कबीरचौरा मण्डलीय अस्पताल में इलाज हेतु पहुचे | जहाँ पर ओ०पी०डी० इमरजेंसी में मौजूद वार्ड ब्वाय दीना यादव ने घटना की गंभीरता को देखे बगैर तुरंत बच्चे को टांका लगाया और बोला कि चार दिन में आपका बच्चा दौड़ने लगेगा | बच्चा बिलकुल ठीक है, कोई घबराने की बात नहीं है और कहा कि बच्चे को 2घंटे बाद हमारे क्लिनिक पर ले आईये, हम उसका वहां पर बढ़िया ईलाज करेंगे | वहां पहुँचने पर बच्चे के पिता और मामा के मना करने के बावजूद उन्होंने बच्चे को प्लास्टर बाँध दिया और बोले की आप डाक्टर मत बनिए |  इस मामले में उक्तदीना यादव द्वारा पीड़िता व उसके परिवार वालों को अपने आप को चिकित्सक बताकर सारा ग़लत कार्य किया गया |जिसके कारण चार दिन बाद बच्चे का पुरा पैर काला पड गया और बी०एच०यू ले जाने पर वहां के डाक्टरों ने केस लेने से मना कर दिया | जिसके बाद पीड़िता व उसके पति शिवपुर के प्राईवेट अस्पताल श्यामा हॉस्पिटल ले गए और अत्यधिक गंभीर हालत होने पर बच्चे का पैर काटना पड़ गया | इस मामले में पीड़ित बच्चे के माता-पिता द्वारा 1 सितम्बर, 2015 को अस्पताल प्रशासन और वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी के यहाँ लिखित शिकायत किया था | लेकिन वहां पर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं किया गया | उनके द्वारा 4, सितम्बर, 2015 को पुलिस में शिकायत की गयी परतु कोइ कार्यवाही नहीं हुयी | इस पूरे घटना को हिन्दुस्तान दैनिक अख़बार ने फालोअप के रूप में कई महीने तक प्रकाशित किया | परन्तु इस मामले में कोइ भी कार्यवाही नहीं हुई | बल्कि अस्पताल प्रशासन उलटे पीडिता को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है |
शिकायत की गयी :  
इसके बाद हिन्दुस्तान अख़बार के एक रिपोर्टर ने पीडिता को मानवाधिकार जननिगरानी समिति के कार्यालय में भेजा जिसके बाद पीडिता की पूरी बात सुनकर
·   राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,
·   राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग,
·   वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी,
·   माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश,
·   मुख्य चिकित्साधिकारी वाराणसी,
·   माननीय स्वास्थ्य मंत्री उत्तर प्रदेश,
·   माननीय प्रधानमंत्री भारत
को लिखित रूप में की गयी |

कार्यवाही हुई :
·   माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय से जिलाधिकारी वाराणसी को इसपर कार्यवाही का निर्देश दिया गया |
·   राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्साधिकारी को नोटिस जारी करते हुए 30 दिन रिपोर्ट माँगी है |
·   राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने भी जिलाधिकारी वाराणसी को नोटिस देते हुए 30 दिन इस केस में FIR सहित मुआवजे की रिपोर्ट माँगी है |   









Wednesday, 2 December 2015

मात्र व शिशु स्वास्थ्य देखभाल हेतु जिला महिला अस्पताल अस्पताल में लापरवाही

सेवा में
अध्यक्ष महोदय
राष्ट्रीय  मानव अधिकार आयोग
नई दिल्ली  |

विषय- जनपद वाराणसी में

मात्र व शिशु स्वास्थ्य देखभाल हेतु जिला महिला अस्पताल अस्पताल में लापरवाही के सन्दर्भ में सन्दर्भ में |  
महोदय ,
       विदित हो कि वाराणसी जनपद के जिला महिला अस्पताल में 29 नवम्बर 2015 दिन रविवार को बिजली की आपूर्ति न होने से मोमबत्ती की रोशनी में गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जिसके कारण गर्भवती माँ व बच्चों की स्थिति  खतरनाक हो सकती है |
     इस अस्पतालों में जनरेटर व डीजल की सुविधा उपलब्ध होने के पर भी इसका उपयोग नहीं किया गया और न ही कोई मैकनिकल को बुलाया गया | यह खबर जनसंदेश टाइम्स व दैनिक जागरण दैनिक समाचार पत्र से ली गयी जिसके आधार पर शिकायत की जा रही है
 अत : आप से विनम्र निवेदन है की उक्त मामलों को संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही करने की कृपा करे |
  
सलग्नक :-  दिनांक- 30 नवम्बर 2015 का जनसंदेश टाइम्स दैनिक समाचार पत्र (पेज न.4 ) की खबर




                                                                 श्रुति
                                                                 ( मैनेजिंग ट्रस्टी )
( मानवाधिकार जननिगरानी समिति )
                                                           मो. 09935599330