Thursday, 10 July 2014

विद्यालय से ड्राप आउट बच्चों के नामांकन व नियमित विद्यालय आने के लिए निकाली गयी रैली |













विद्यालय से ड्राप आउट बच्चों के नामांकन व नियमित विद्यालय आने के लिए निकाली गयी रैली |

वाराणसी 10 जुलाई 2014 जिले के सरायमोहाना गाँव के सरकारी प्राथामिक विद्यालय द्वारा बच्चों के नामांकन व नियमित विद्यालय आने के लिए क्षेत्र के हर गलियारों में जागरूक करने के लिए रैली निकली | इस रैली का नेतृत्व ग्राम प्रधान, विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री मती रजिया सुल्तान, विद्यालय प्रवंधन समिति के अध्यक्ष आर.के. सहानी व मानवाधिकार जननिगारानी समिति के सद्यो ने किया | रैली में समिति के समिति केकार्यकर्ताओं ने सास्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति किये – हम जाते है स्कूल,क्योकि वंहा पढ़ाई होती खूब , हर बच्चे का है अधिकार रोटी खेल पढाई प्यार इस तरह के गीत व नारे रैली में गूंजते रहे जिसको देखने के लिए गाँव के लोग अपने काम छोड़ कर रैली का उत्साह को बढ़ाया | इस रैली के बाद सभा का आयोजन हुआ जिसमे सर्व प्रथम विद्यालय प्रवंधन समिति के अध्यक्ष आर.के. सहानी ने अपने सम्बोधन का कहा “ आज हर एक बच्चा देश के लिए महत्वपूर्ण है अगर देश को आगे बढाना है तो बच्चों को नियमित स्कूल आना होगा |” ग्रामप्रधान पति सम्भू निषाद ने कहा “ अगर सभी माता-पिता यह सोच की ही हमें अपने बच्चे को पढ़ाना है तो निश्चित ही पूरा गाँव शिक्षित हो जाएगा” , मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रतिमा पाण्डेयजी ने अपने संबोधन में बच्चों के लिए कहा कि अगर सभी बच्चे अपने –अपने दोस्तों को स्कूल लेकर आये तो आने वाले समय में हमारा देश साक्षरता में सबसे आगे रहेगा | सभा का समापन करते हुये विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री मती रजिया सुल्तान ने काहा कि आज जिस तरह का सहयोग अविभावको व सामाजिक संगठनो का मिला इसी तरह मिलता रहेगा तो देश का सभी परिषदीय विद्यालय में बच्चे दाखिला लेना शुरू कर देंगे और प्राइवेट विद्यालय का अस्तित्व अपने आप कम हो जाएगा | विद्यालय के बच्चो ने बाल अधिकारो पर चर्चा करते हुए व बाल अधिकार को संरक्षित करने के पहल पर सपथ लिया | बच्चों ने यह सपथ लिया की जो बच्चे रोज स्कूल नहीं आ रहे है हम उन बच्चो को अपने साथ लाने का प्रयास करेंगे दूसरा सपथ यह है कि बाल अधिकार को बचाए रखने हेतु हम पहल करेंगे
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सामिल रहे श्री मती रजिया सुल्तान (प्रधानाध्यापक ) , प्रताप नारायण सिंह ( साहयक अध्यापक ),अनुराधा (भार्गव सहायक अध्यापक) ,शकील अहमद ( साहयक अध्यापक ), सदगुरु शरण ( साहयक अध्यापक ), अनुपम गुप्ता ( साहयक अध्यापक ) , शशीप्रभा( साहयक अध्यापक ) , रीना कन्नौजिया( साहयक अध्यापक ) ,अशोक मिश्रा ( साहयक अध्यापक ) , विनोद यादव ( साहयक अध्यापक )हेमंत कुमार मौर्या ( साहयक अध्यापक ) अरविन्द कुमार यादव( साहयक अध्यापक ) , मधुलिका निषाद (शिक्षामित्र ), बीनू शर्मा ( शिक्षा मित्र ) ,विद्यालय प्रवंधन समिति के अध्यक्ष आर.के. सहानी प्रतिमा पाण्डेय, आनंद निषाद ,ब्रिजेश,राजेन्द्र प्रसाद ( सदस्य मनवाधिकार जन निगरानी समिति )

Saturday, 28 June 2014

आयर मुसहर बस्ती में कुपोषण ग्रस्त बच्चे मौत के नजदीक…..

वाराणसी ! हरहुआ ब्लाक के अन्तर्गत आयर मुसहर बस्ती में पाखंडी मुसहर का लड़का पवन जिसकी उम्र 2 वर्ष 4 माह है गंभ्भीर कुपोषण से ग्रस्त प.दीनदयाल हास्पिटल, वाराणसी में भर्ती है | इस बच्चे का वजन 4.5 kg  है | 
पाखंडी मुसहर ईट –भट्टे पर ईट बनाकर माह के 12 सौ से 16 सौ रुपये की आमदनी पर अपने परिवार का किसी तरह भरण- पोषण करते है इनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है और न ही रहने के लिए घर-जमीन नहीं है । मनरेगा का जाबकार्ड बना है लेकिन उस पर भी कभी काम नहीं मिला जिससे पाखंडी मुसहर अपने परिवार का भरण- पोषण के लिए भट्टा मालिको से कर्ज लिए और पिछले 8 माह से पाखंडी मुसहर परिवार सहित ईट –भट्टे पर ईट बनाने का काम करने लगे और  भट्टे पर बच्चे के देख-रेख हेतु ICDS की सेवाये व स्वास्थ्य सुविधाये व पर्याप्त भोजन न मिलने से पवन कुपोषण के ओर जाने लगा | 
विदित हो कि 2 वर्ष पहले वाराणसी में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व बाल सरंक्षण आयोग की जन सुनवाई में आयोग द्वारा यह निर्देश दिया गया था कि प्रत्येक ईट-भट्टों पर आंगनवाडी केन्द्र खोला जाय जिससे भट्टे पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को स्वास्थ्य-पोषण की सुविधा मिल सके | लेकिन इस मामले पर राज्य सरकार और प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया और आज तक किसी भी भट्टे पर ICDS सेंटर नहीं खुला | जब पाखंडी मुसहर का परिवार भट्टे से अपने गाँव लौट कर आये तो मानवाधिकार जननिगरानी समित के कार्यकर्ताओं ने बच्चे का तुरन्त स्वास्थ्य जाँच किया जिससे पता चला कि बच्चा IV ग्रेड में है इस बच्चे को तुरंत प.दीनदयाल हास्पिटल में किसी तरह भर्ती कराये | अभी भी बच्चे की स्थिति गंभ्भीर है | मानवाधिकार जननिगरानी समिति के कार्यकर्ता द्वारा जून 2014 में स्वास्थ्य एंव पोषण की स्थिति का सर्वे किया गया जिसमे गम्भीर कुपोषित बच्चे निम्न है -
क्रमसंख्या
आयर गाँव के टोले कानाम
गम्भीर कुपोषित कीसंख्या
1
आयर मुसहर बस्ती
2
2
आयर नई बस्ती
9
3
आयर मुस्लिम बस्ती
4
4
आयर ख़ास बस्ती
3
5
आयर चमार बस्ती
3
6
भैठौली चमार बस्ती
6
7
भैठौली मुस्लिम बस्ती
0
TOTAL
27

सम्पर्क -
श्रुति नागवंशी (मैनेजिंग ट्रस्टी) - Mob. +91 9935599330
शोभनाथ (बालाधिकार कार्यकर्ता) - Mob.  +91 9452762898
आनन्द प्रकाश (एडवोकेसी कोऑर्डिनेटर) – Mob.  +91 9956380627 

Saturday, 14 June 2014

थियेटर इन एजुकेशन







मानवाधिकार जननिगरानी समिति/जनमित्र न्यास  द्वारा एक्टविस्ट और बच्चों का थियेटर इन एजुकेशन कार्यशाला |
          बाल अधिकार से वंचित बच्चों के बीच बाल सहभागिता की अवधारणा को लेकर हम सभी लम्बे समय से कार्यरत हैं । हमारे द्वारा बाल सहभागिता के मदे्नजर बच्चों के बीच विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम संचालित किये जाते रहे हैं, जिससे बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी, उनका व्यक्तित्व विकास, बच्चों को अपनी सोच अपेक्षाओं को अभिव्यक्त करने के अवसरों में सहयोग मिलता रहा है । निश्चित रुप से इन कार्यक्रमों का सकारात्मक प्रभाव भी बच्चों पर पड़ा है। जिसके कई सफल उदाहरण हम सभी के सामने आये हैं | जब बच्चों ने अपने अधिकार हनन को समझते हुए स्वंय आगे बढकर अपने अधिकारों के संरक्षण की पैरवी की है । ऐसे में हम एक्टविस्ट की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि हम अपने बाल समूह के बच्चों को अपने विचारों कि अभिव्यक्ति का मंच और अवसर दें, जिससे उनकी सोच, अपेक्षाओं, समस्याओं, चुनौतियों से परिचित हो सकें और बच्चों के अनुकूल निति नियमों में बदलाव किये जाने पर विचार किये जाने कि पहल हो सके |
बच्चों में आत्मविश्वास का निर्माण, विश्लेष्णात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण, सृजनात्मकता, जिज्ञासा, मुद्दों पर सजगता, आपसी सहयोग, सामूहिकता का विचार और नेतृत्व के लिए हम सभी लगातार प्रयत्नशील हैं | 


विद्यालय विकास में विद्यालय प्रबन्धन समिति व अध्यापको की भूमिका



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“विद्यालय विकास में विद्यालय प्रबन्धन समिति व अध्यापको की भूमिका एवं जिम्मेदारी” विषय पर थियेटर के माध्यम से संवाद 
तीन लघु नाटको समस्या, संभावना और बदलाव का बच्चो द्वारा मंचन, “भूमिका एवं जिम्मेदारी” नामक पाकेट बुक का विमोचन एवं तीन विद्यालय प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को विशिष्ट योगदान के लिए जनमित्र सम्मान 
वाराणसी, 24 मई, 2014 पराड़कर स्मृति भवन, मैदागिन में विद्यालय विकास में विद्यालय प्रबन्ध समिति एवं अध्यापको की भूमिका विषय पर थियेटर के प्रभावशाली माध्यम से संवाद का आयोजन मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा किया गया | जिसमे वाराणसी के विभिन्न ग्रामीण विद्यालयों के 25 विद्यालय प्रबन्ध समिति एवं अध्यापक समूह से लगभग 100 लोगो की महत्वपूर्ण भागीदारी किया | इस संवाद कार्यक्रम में विद्यालय विकास में प्रबंधकीय गुणवत्ता सुधार में वाराणसी पिंडरा स्थित विद्यालय में अग्रणी भूमिका लेने हेतु प्राथमिक विद्यालय पिंडरा न0 2 की विद्यालय प्रबन्ध समिति की उपाध्यक्षा श्रीमती सुरसती देवी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहिरौली हरहुआ विद्यालय प्रबन्धन समिति की अध्यक्षा श्रीमती बिंदु देवी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरौना अराजीलाइन की अध्यक्षा श्रीमती उर्मिला देवी को जनमित्र सम्मान से सम्मानित किया गया | 
साथ ही विद्यालय प्रबन्ध समिति की भूमिका एवं जिम्मेदारियां शीर्षक से पाकेट बुक का विमोचन किया गया | यह पाकेट बुक से विद्यालय प्रबन्धन समिति की भूमिका एवं जिम्मेदारियों को बहुत ही सरल भाषा में समझा जा सकता है | 
जन संवाद के सशक्त माध्यम थियेटर से तीन लघु नाटको समस्या, संभावना और बदलाव का मंचन बच्चो द्वारा कर यह सन्देश देने का प्रयास किया कि स्कूल में बच्चो की नजर में पठान पाठन के दौरान क्या समस्या आती है और कैसे उन समस्याओं को विद्यालय प्रबन्धन समिति की सहभागिता से दूर किया जा सकता है | 

Friday, 11 April 2014

उत्तर प्रदेश में बच्चों की स्थिति

8 अप्रैल वाराणसी, आज पराड़कर भवन मैदागिन में बाल अधिकारों पर कार्यरत विभिन्न संस्थाओ की साझा संगठन वायस ऑफ पीपुल और क्वालिटी इन्शटीटीयूश्नल केयर एंड अल्टरनेटिव फॉर चिल्ड्रेन द्वारा संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गयी | वायस ऑफ पीपुल (VOP) और क्वालिटी इन्शटीटीयूश्नल केयर एंड अल्टरनेटिव फॉर चिल्ड्रेन (QIC-AC) बच्चों के मुद्दों पर प्रतिबद्ध पैरोकार राज्य स्तरीय संगठन है | जिसके द्वारा उत्त्तर प्रदेश में बच्चों की स्थिति के सन्दर्भ में एक रिपोर्ट साझा किया गया| इस रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में बच्चों की स्थिति हर क्षेत्र में बहुत ही चिंताजनक स्थिति में है फिर चाहे वह उनके जीवित और स्वस्थ रहने का मामला हो या शिक्षा का हो या या सुरक्षा का मामला हो | देश में इस समय देश की सबसे बड़ी पंचायत का चुनाव शुरू हो चुका है, सभी राजनैतिक दलो का चुनावी मुद्दा देश के विकास है | लेकिन देश की अगली पीढ़ी बच्चे और बच्चों के मुद्दे इन सब के बीच कंही भी एजेन्डे में नही है |
राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टिया जनता के लिए बिजली, पानी, सडक, रोजगार के लोक लुभावने वादों के साथ प्रचार प्रसार में जुटीं है और अपने पक्ष में वोट कराने के लिए हर सम्भव कोशिश कर रहीं हैं | परन्तु देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा लगभग 42% जो बच्चे हैं और 18 वर्ष से कम उम्र के हैं उनके जीवन जीने, स्वस्थ्य रहने, उनके विकास, सुरक्षा और भागीदारी जैसे मसलों विशेष केन्द्रित होकर स्पष्टता के साथ पहल किसी भी पार्टी के घोषणा पत्र में दिखाई नही देता है |
शिखर प्रशिक्षण संस्थान की सचिव सुश्री. संध्या ने कहा कि VOP एवं QIC-AC द्वारा जारी इस रिपोर्ट सहित सरकारी संस्थानों द्वारा किये गये अध्ययन और आकड़े हमारे सामने बच्चों की चिंताजनक स्थितियों को सामने लाते हैं | प्रदेश में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य स्तर का बेहद खराब स्थिति में है | वंही इनमें सुधार लाने वाले विभाग बच्चों के प्राथमिक स्वास्थ्य और पोषण विकास कार्यक्रम का कार्य अप्रभावी स्थिति में है | सरकारों की जिम्मेदारी है की वे इनमें गुणवत्ता सुधार के प्रभावी उपाय करें|
प्रेसवार्ता में शम्भूनाथ रिसर्च संस्थान की कार्यक्रम निदेशिका एवं (QIC-AC) के कोर टीम सदस्या सुश्री. रोली सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बच्चों के खिलाफ अपराघ का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है| इस मुद्दे को गम्भीरता से लेते हुए प्रदेश में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किया जाना अति आवश्यक है | इस स्थिति से निपटने के लिए हमें बच्चों विकास और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तन्त्र को सुदृढ़ करते हुए विभिन्न प्रभावी कारकों को बाल अधिकारों के लिए सम्वेदनशील होकर कार्य करना होगा |
वायस ऑफ पीपुल की संयोजिका श्रुति नागवंशी ने कहा कि बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) अपने सहयोगी संस्थाओ के साथ मिलकर तैयार किया गया बाल अधिकार घोषणा पत्र तैयार कर सभी राजनैतिक पार्टियों के प्रमुखों से मिलकर दिया और उनसे उनके पार्टी घोषणा पत्र में बच्चो के हित में शामिल करने की अपील किया | साथ ही बाल अधिकार घोषणा पत्र के समर्थन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रो में समुदाय के बीच सघन चर्चा चलाकर दो लाख से अधिक हस्ताक्षर कराए |
आज पांच साल से कम आयु के करीब 50 प्रतिशत भारतीय बच्चों की अनदेखी की जाती है, उन पर ध्यान नही दिया जाता हैं। लाखों बच्चे हर साल बीमारियों के कारण दम तोड़ते हें । देश के अस्सी लाख बच्चे स्कूल नही जा पाते । देश के नीति निर्धारकों के लिए बच्चों की यह बदहाल स्थिति चिन्ता की बात नही है क्योंकि बच्चे मतदाता नही है । बच्चों के मुददे, समस्याए किसी राजनैतिक पार्टी का एजेंडा नही होती है।
वायस ऑफ पीपुल और क्वालिटी इन्सटीट्यूशनल केयर एण्ड आल्टरनेटिव फॉर चिल्ड्रेन वंचित बच्चों के जीवन मे स्थायी बदलाव सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है इसी संदर्भ में बच्चों की आवाज सुनी जा सके और उनकी शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और भागीदारी के बच्चों के अधिकारों पर एक रिपोर्ट “उत्तर प्रदेश में बाल अधिकारों की स्थिति” पर कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक है | 


शिक्षा
2012-13 में जंहा बुनियादी शिक्षा के लिए कुल बजट 25109 करोड की व्यवस्था की गई थी वहीं वर्ष 2013-14 के लिए 21,520 करोड की व्यवस्था की गई है जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले 3589 करोड़ रुपया कम है।
नेशनल यूनिवर्सिटी आफॅ एजूकेशन, प्लानिंग एण्ड एडमिनिस्ट्रेश्न से जारी एजूकेशन डेवलेपमेंट इन्डेक्स 2012-13 के आंकडों पर नज़र डालने पर पता चलता है कि उत्तर प्रदेश वर्ष 2011-12 में इस सूची में 32 वें स्थान पर था वही वर्ष 2012-13 में फिसल कर 34 वें स्थान पर आ गया है। उत्तर प्रदेश एजूकेशन डेवलेपमेंट इन्डेक्स में नीचे से पाचॅ गम्भीर स्थिति वाले राज्यों की सूची में आ गया है।

कुपोषण
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे- 3 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 42 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं तथा प्रदेश का हर दूसरा बच्चा कुपोषित पाया गया है । कुपोषित बच्चों में मृत्यु की सम्भावना सामान्य बच्चों की तुलना में 9 गुना अधिक होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में लम्बाई के अनुपात में कम वजन होना, किसी भी देश या प्रदेश में स्वास्थ्य पोषण सेवाओं की गुणवत्ता का आंकलन करने का एक महत्वपूर्ण मापदण्ड है । प्रदेश में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अंतर्गत समन्वित बाल विकास योजना के माध्यम से आंगनवाडी केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं और बच्चों, किशोरी, बालिकाओं, गर्भवती/धात्री महिलाओं के लिए अनुपूरक पोषाहार का वितरण कराकर कुपोषण की समस्या को दूर किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। चयनित जनपदों में पोषण पुनर्वास केन्द्र स्थापित कर गंभीर कुपोषित बच्चों का उपचार किया जाता है। फिर भी प्रदेश के बच्चों में कुपोषण की समस्या अभी बनी हुई है।
वायस ऑफ पीपुल (VOP) संगठन द्वारा किये गये सर्वे में 112 कुपोषित बच्चों वाले परिवारों में 79 प्रतिशत बच्चे 0-1 वर्ष की उम्र के हैं तथा शेष 21 प्रतिशत 1-5 वर्ष की उम्र के हैं । 37 प्रतिशत बच्चे को मिलने वाला पोषण मानक के अनुरुप नही है जिससे उनके पोषण के स्तर में कमी दिखाई दे रही है । सर्वेक्षित 112 कुपोषित बच्चों में से 21 प्रतिशत बच्चों में वजन गिरने की स्थिति दिखाई दे रही थी, 13 प्रतिशत बच्चों मे बार-बार बुखार आने की समस्या, 12 प्रतिशत बच्चों को उचित पोषण न मिलने के कारण वे जल्दी थक जाने की समस्या से पीडि़त रहें । इन स्थितियों में 75 प्रतिशत बच्चे गंभीर कुपोषण की समस्या से ग्रस्त हैं तथा 25 प्रतिशत बच्चे मध्यम दर्जे के कुपोषित हैं। 


उत्तर प्रदेश में बाल सुरक्षा की स्थिति
उत्तर प्रदेश की 2011 की जनगणना के अनुसार 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों की संख्या 2001 में जहां 1000 पर 916 थी वही 2011 की जनगणना के अनुसार यह घट कर 1000 पर 899 हो गई है । विगत 10 वर्षो में देखें तो 17 अंकों की गिरावट आई है सेन्सेक्स 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 908 प्रति हजार लिंगानुपात है और 0-6 वर्ष के बच्चों में 899 प्रति हजार लिंगानुपात है।
उत्तर प्रदेश में बच्चों के विरूद्ध अपराधों में 16.6: की बढ़ोत्तरी हुई है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरों 2012 के अनुसार उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 43% बच्चों के अपहरण के मामले दर्ज किये गये है।
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरों 2012 के अनुसार उ0प्र0 देश में बच्चों के विरूद्ध दुष्कर्म के मामले में पहले स्थान पर है। इसके बावजूद देश में बाल सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नही उठाए जा रहे है ।
प्रदेश में गायब होने वाले बच्चों के आंकड़ों को लेकर सरकार के विभागों में काफी असमानता दिखाई दे रही है। जिसके कारण ट्रैकिंग सिस्टम पर भी गम्भीर सवाल खडे़ हो रहे है। एक तरफ सरकार द्वारा विधान सभा में दिये गये आंकड़ों की जानकारी में वर्ष 2011 से अप्रैल 2013 तक 7320 बच्चे गायब बताए वही प्रदेश की अपराध अनुसंधान ब्योरों के अनुसार 7712 बच्चे गायब है ।
वर्ष 2013 में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 3565 लोगों पर विभिन्न धाराओं के अंतर्गत केस पंजीकृत किए गए हैं
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012-13 में बच्चों के अपहरण के 4265 मामले दर्ज किए गए हैं जिसमें से 4052 लडकियां है तथा 213 लडके हैं |
उत्तर प्रदेश में किशोर न्याय अधिनियम के अन्र्तगत विधि के विरूद्ध कार्य करने वाले बच्चों की स्थिति अति दयनीय है। उत्तर प्रदेश में 75 जिले है जिसमें लड़को के लिए 19 और लड़कियों के लिए 5 सिर्फ 24 सुधार गृहो का ही निर्माण किया गया है।
QIC-AC द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिला जेलों में अपनी माताओं के साथ रह रहे 0 से 6 वर्ष के बच्चों की संख्या सूचना के अधिकार से प्राप्त गई जिसमें सिद्ध दोष महिला बंदियों के साथ 41 लड़के और 41 लड़िकया रह रहे हैं वही विचाराधीन महिला बंदियों के साथ 204 लडके और 154 लडकिया रह रहे हैं । इस प्रकार वर्तमान में 440 लड़के और लड़किया अपने माताओं के साथ विभिन्न जेलों में बिना किसी जुर्म के सजा भुगत रहे है


हमारी मांगे-

  1. उत्तर प्रदेश में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन शीघ्र से शीघ्र किया जाए । यह हमारी राजनैतिक दलों/उम्मीवारों से पहली और महत्वपूर्ण मांग है। इससे राज्य में शिकायतों का निवारण और नीतियों और अधिनियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा।
  2. बच्चों के लिए राज्य बजट में बच्चों से संम्बंधित नीतियों के उचित कार्यान्वयन के लिए वृधि की जानी चाहिए। शिक्षा के अधिकार कानून को लागू हुए 4 वर्ष पूरा होने के बाद भी उ0प्र0 अभी काफी पीछे है। रिपोर्ट के अनुसार अभी भी आधारभूत कमिया है जेसे शौचालय, स्वच्छ पीने का पानी, खेल का मैदान, स्वच्छता, आदि मानकों के अनुरुप नही है।
  3. अर्ली चाइल्ड केयर एंड एजुकेशन (ECCE) नीतियों का प्रदेश में सही प्रकार से क्रियान्वयन कराना सुनिश्चित करना।
  4. समेकित बाल विकास योजना मिशन का सही प्रकार से क्रियान्वयन ताकि कुपोषण के खतरे से लडा जा सके।
  5. भोजन का अधिकार कानून की राज्य स्तरीय नीतिया बनाई जाए और उनका क्रियान्वयन किया जाए ताकि प्रदेश में बच्चों के पोषण की स्थिति में सुधार आ सके।
  6. समेकित बाल सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रदेश में सभी स्तरों अथार्त् राज्य स्तर, जिला स्तर, ब्लाक स्तर और ग्राम स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों का पुर्नगठन एवं उनका सक्रियकरण किया जाए।
  7. गुमशुदा बच्चों के लिए एक मजबूत ट्रेकिंग सिस्टम बनाया जाए, जो पंचायत स्तर से राज्य स्तर तक हो। ग्रामीण क्षेत्रों से बच्चो के गुमशुदा होने पर जिम्मेदारी पंचायतों की होगी।
  8. यौन शोषण और हिंसा से पीडि़त बालक और बालिकाओं के केसों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों द्वारा तेजी से की जाए।
वायस ऑफ़ पीपुल (VOP) एवं क्वालिटी इन्शटीट्यूशनल केयर एंड अल्टरनेटिव फॉर चिल्ड्रेन (QIC-Ac) द्वारा चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) , नई दिल्ली के सहयोग से


Wednesday, 9 April 2014

भूख से दम तोड़ी

एक बच्ची ने भूख से दम तोड़ी तो दूसरे आखिरी साँस के लिए लड़ रहे



ग्राम ठाकुरपुर ग्राम पंचायत बसनी विकास खण्ड बड़ागाव जिला- वाराणसी की निवासी प्रियंका 2.8 वर्ष का11/03/2014 को लगभग 09:30 बजे सुबह भूख से मौत हो गया | जिसका आंगनबाड़ी में नाम तो पंजीकृत था मगर वह आंगनबाड़ी केंद्र गाव की परियोजना क्षेत्र से बाहर प्राथमिक विद्यालय में संचालित होता हैं जहा परियोजना क्षेत्र के किसी भी गर्भवती, धात्रि व बच्चों को सम्पूर्ण लाभ नही मिलता उसमे प्रियंका भी सामिल थी | प्रियंका दो बहनों में छोटी थी परिवार में कीसी प्रकार का कोई रासन कार्ड नही ना ही कृषि हेतु कोई जमीन हैं पूरा परिवार त्रिपाल के निचे जीवन यापन करता हैं जिसमे मृतका के माता-पिता आँख से विकलांग हैं वहागांव में स्वयं सहायता समूह चलता हैं जिसमेंलोन पर सगड़ीलेकर आस-पास के बाजार में सगड़ी चला कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते थें जिस दिन कुछ कमाई हो जाता था उस दिन तो घर पर चूल्हा जलता था नही तो फाका-कसी के दौर से गुजरना पड़ता हैंसंजय रासन कार्ड बनवाने के लिए कई बार ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी से कहे मगर ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी एक नही सुने और कोई रासन कार्ड नही बनाये इसी बीच प्रियंका धीरे-धीरे गम्भीर कुपोषण का शिकार होकर बीमार हो गयी जिसका ईलाज कराने 22/02/2014 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागाव गये वहा महजुद चिकित्सक ने 25/02/2014 को मृतका के पिता प्रियंका को लेकर मंडलीय अस्पतालगये वहा जाने के बाद वहा कार्यरत चिकित्सक ने कहा कि यहा भर्ती तो कर लेगे लेकिन बचेगी नही तब वह प्रियंका को घर लेकर चले आये आस-पास से कर्ज लेकर यहा तक कि अपने घर का खर्च चलाने वाली सगड़ी को भी 6000/-रूपये में बेच कर आस-पास के डा. से ईलाज कराये मगर प्रियंका को आज बचा न सके | इसी तरह उपरोक्त निवासी सुरेन्द्र उम्र 1 वर्ष माता रुक्मिना देवी पिता भग्गन प्रजापतियह भी गम्भीर कुपोषण से जूझ रहा हैं इनके भी परिवार में ए.पी.एल. रासन कार्ड हैं जिसपर

कभी भी किसी तरह का अनाज नही मिलतासुरेन्द्रको कुपोषण से मुक्त होने के लिए किसी तरह को कोई सहायता या प्रक्रिया नही चलाया जा रहा हैं |भग्गन प्रजापति दिहाड़ी मजदूरी का कामकरते हैं जिससे पुरे परिवार का खर्चा चलता हैं जब मजदूरी का काम नही मिलता नही मिलता तो बिना खाये भूखे ही पुरे परिवार को सोना पड़ता हैं |इसी तरह उपरोक्त निवासी विपिन कुमार उम्र 1.4 वर्ष माता संगीता देवी पिता राजकुमार गम्भीर कुपोषण से जूझ रहा हैं जिसके परिवार में ए.पी.एल. रासन कार्ड हैं जिसपर किसी तरह का अनाज नही मिलता मनरेगा जांबकार्ड तो हैं पर काम नही मिलता प्रियंका के मौत के बाद जब जाँच सुरु हुआ तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा सबसे बड़े लापरवाही की घटना कि संदर्भन प्रपत्र पीछे के डेट 25/02/2014 में दिखा कर 12 मार्च 2014 को बिना डॉ. को दिखाए संदर्भन प्रपत्र का दोनों भाग कुपोषित बच्चा विपिन के माँ को देकर अपना जान छुड़ा ली कहि पर कोई जाँच व ईलाज का सलाह नही दी |इसी तरह चाँदनी उम्र 06 माह माता शबरुनिशा पिता इलियास ग्राम छिरियाँ ग्रामपंचायत लखमीपुर ब्लाक बड़ागांव वाराणसी की निवासी गम्भीर कुपोषण से जूझ रही हैं इस परिवार में ए.पी.एल. रासन कार्ड हैं जिसपर कोई अनाज नही मिलता जबकि ग्रामपंचायत लखमीपुर में 51 अन्त्योदय, 86 बी.पी.एल. रासन कार्ड हैं | इनके पिता शहर में जाकर बुनकरी का काम करते हैं |

Thursday, 16 January 2014

गाँव –गाँव तक पहुंचा बेटी ही बचायेगी

 



गाँव –गाँव तक पहुंचा बेटी ही बचायेगी  




गाँव –गाँव तक पहुंचा बेटी ही बचायेगी अभियान - बेटी के हक़ में लिया शपथ
15 जनवरी 2014 को अमर उजाला की अनूठी पहल बेटी ही बचायेगी अभियान के तहत मकर संक्रान्ती के अवसर पर  मानवाधिकार जननिगारानी समिति , जनमित्र न्यास एवं सावित्री बाई  फुले महिला पंचायत से जुड़े मानवाधिकार पक्षकारो सहित सैकड़ो लोगो ने बेटी के हक़ में लिया शपथ | यह टीम चिरईगाँव ब्लाक के सरायमोहाना में पंहुँच कर बेटी के संदर्भ में जागरुक करते हुए शपथ ग्रहण कराये इस क्रम में दी लाईट क्लासेस कोटवा, सरायमोहाना के शिक्षक,शिक्षिका व बच्चों ने भी इस कार्यक्रम में अनूठी पहल दिखाई, जिसमे मुख्य रूप से कीर्ति, आकांक्षा मौर्या, प्रज्ञा मौर्या, आशीष प्रकाश, बिपिन चौधरी, अवनीश सिंह राठौर, अवनीश शुक्ला ब्रिजेश रहे |  
विदित हो की यह समिति पिछले 4 वर्षो से दलित, वंचित व अल्पसंख्यक समुदाय की 45 लड़कियों को पूर्व माध्यमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक मदत कर रहा है | साथ ही बाल विवाह के खिलाफ बड़ा अभियान खडा किया है |