Tuesday, 4 September 2018

नवजात शिशु देखभाल



गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल क्षमतावृद्धि कार्यशाला  ।
ट्रेनर :- डॉ. आमिर व् इमरान जी (http://vatsalya.org.in/ )
दिनांक 30 अप्रैल से 02 मई 2018 तक ।
स्थल :- पीवीसीएचआर कार्यालय बघवानाला वाराणसी ।
सर्वप्रथम परिचय सत्र चला जिसमें ट्रेनर सहीत कार्यशाला में भाग लेने वाले जेएमएन कार्यकर्ताओं द्वारा अपने कार्य के अनुभव सही कार्य क्षेत्र को लेकर कार्य करने के विषय पर परिचय हुआ तथा कार्यशाला के उद्देश्य को लेकर कार्यशाला में भाग लेने वाले  जेएमएन कार्यकर्ताओं से जानकारी लिया गया वही उपरोक्त कार्यशाला में सीखने की अपेक्षा को लेकर सर्वप्रथम प्री टेस्ट लिया गया । तथा ट्रेनर द्वारा उपरोक्त प्री टेस्ट के अध्ययन के बाद  कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी कार्यकर्ता को प्राथमिक स्तर की सभी जानकारियां है इसके आगे जानकारी दिया जाएगा ।
इसके बाद किशोरियों की उम्र  को लेकर डब्ल्यूएचओ मानक में जानकारी लिया गया जिसमें कार्यकर्ताओं द्वारा बताया गया कि डब्ल्यूएचओ के मानक अनुसार किशोरियों का उम्र 10 से 19 साल के बीच होता है । जिसके बाद नवजात शिशु एवं पूर्व नवजात शिशु के दिनों के विषय में जानकारी लिया गया जिसमें कार्यकर्ता द्वारा बताया गया कि नवजात शिशु 28 दिन व पूर्व नवजात शिशु 1 सप्ताह का होता है । जिसके बाद नवजात शिशु पूर्व नवजात शिशु की मृत्यु आंकड़ों को ग्राफ के माध्यम से जानकारी दिया गया कि नवजात शिशु 28 दिन का है जिसका 50%  नवजात शिशु का मृत्यु 48 घंटे के अंदर होता है । इसी प्रकार शिशु मृत्यु को घंटे से लेकर दिन, सप्ताह, महीनों तक के आंकड़ों को ग्राफ के माध्यम से जानकारी दिया गया । और नवजात के खतरे के लक्षण को बताया गया जिस के बचाव को लेकर भी निम्न जानकारियां दिया गया कि गोल्डन डे मां के गर्भ में बच्चा आने से लेकर बच्चे के जन्म के 2 वर्ष तक कुल 1000 दिन को गोल्डेन डे कहा जाता है यदि मां के पेट में गर्भ आने से नवजात शिशु के जन्म  के 48 घंटे तक  नियमित मानक अनुसार  मां सहित  जन्मे बच्चे  को  सभी सेवाएं मिल जाए तो 50%  नवजात शिशु मृत्यु को कम किया जा सकता है ।
मां के पेट में गर्भ आने के बाद गर्भवती का गर्भ परीक्षण यूरिन टेस्ट हो कि महिला गर्भवती है या नहीं गर्भ की जानकारी मिलने के बाद  गर्भवती का पंजीकरण होकर एमसीपी कार्ड मीले उसके बाद  बीपी, एनीमिया, ब्लड सुगर, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, वजन, के परीक्षण के बाद टीटी का टीका व आयरन फोलिक एसिड की 180 गोली का सेवन 20 सप्ताह के अंदर करें, यदि एनिमिक गर्भवती हो तो वह 360 गोली का सेवन करें, यदि HRP गर्भवती हो तो डॉक्टर के सलाह अनुसार आयरन का सेवन करें, व कैल्सियम की गोली का सेवन करें, उपरोक्त अनुसार नियमित सभी जांचें हो तथा गर्भवती माता को खान पान की सेवाएं सहित परिवार का प्यार व गर्भवती महिला को दिन में 2 घंटे व रात में कम से कम 8 घंटे आराम ( सोये ) करें तथा पोषण युक्त समय-समय पर नियमित तिरंगा थाली का भोजन मिलता रहे व गर्भवती साफ सफाई एवं स्वच्छता के साथ दो-दो घंटे पर जो कुल मिलाकर पहले से एक चौथाई अधिक भोजन खाना  चाहिए (खाने की बार को बढ़ावे) नियमित भोजन खाती रहे जिससे गर्भवती का 3 माह में न्यूनतम वजन 1-1 1/2 किग्रा बढ़े तथा 4-6वे माह तक 3 - 4 किग्रा वजन बढ़े तथा 7-9वे महीने में 5 - 7 किलो वजन बढ़े कुल मिलाकर 10-12 किग्रा वजन बढ़ना चाहिए ।  तथा सुरक्षित संस्थागत प्रसव हो यदि गर्भवती HRP हो तो प्रसव पूर्व संपूर्ण तैयारियां जैसे ब्लड देने वाले देने वाले सदस्य, गर्भावस्था की समस्त जाँच रिपोर्ट, प्राइवेट संसाधन का संपर्क नंबर, इमरजेंसी हेतु रुपए अपने पास रखें तथा लेबल 3 हॉस्पिटल जहां आपरेशन से प्रसव होता हो व हॉस्पिटल में ब्लड बैंक की सुविधा हो ।  तथा प्रसव होने के बाद बच्चे की शरीर पर Meconium की हल्की साफ सफाई के तुरंत बाद जल्द से जल्द लगभग आधे घंटे के अंदर शिशु को कोलेस्ट्रम पिलाने से माता का प्लेसेंटा डिलीवरी, यूट्रस का सिकुड़ना व रक्त स्राव कम हो जाता है जिसे BUP (Bliding Utters Placenta) कहते हैं ।  शिशु मां के गर्भ में 37℃ के तापमान में रहता है जब वह मां के गर्भ से जन्म लेता है तो तापमान अधिक या  कम रहता है जिस तापमान को बनाए रखने के लिए शिशु को KMC प्रसूता या परिवार का अन्य कोई सदस्य की सेवाएं दे इस पर  ख्याल न करने पर हाइपोथर्मिया से बच्चे पीड़ित हो जाते हैं जिस के बचाव के लिए HBNC कार्यक्रम  के तहत साफ सफाई से हाथ धोकर बच्चे का वजन लेना तापमान नापना कंबल लपेटना स्वास्थ्य के संक्रमण को पहचानने हेतु सांसे गिनने से उपरोक्त प्रक्रिया से हाइपोथर्मिया रोग से बचाया जा सकता है । नवजात के स्तनपान की सही स्थिति पर चर्चा करते हुए बताया गया की शिशु का गाल फुला हो, नाक दबा न हो, माता के स्तन का अरोएला का भाग शिशु के मुंह में हो शिशु को 8 से 10 मिनट तक स्तनपान कराना चाहिए और वही बच्चा कम से कम 1 दिन में सात से आठ बार पेशाब करें तो समझ लो कि बच्चा भरपेट दूध पी रहा है । नवजात के शरीर के hit loss न हो इसके लिए शिशु की सही तरीके से कपडे में लपेटने की विधि को भी बताया गया। इसके बाद टीकाकरण ग्रोथ चार्ट के बारे में बताया गया जिसमें टीकाकरण के प्रकार और कार्य पर चर्चा हुआ।  इसके बाद आशा के नवजात के जन्म के बाद 42 दिन में 6 और 7 विजिट की चर्चा और उसके पास सामग्री और कार्य / सेवाओं की चर्चा की गयी।  नवजात की देखभाल , पोषण, बीमारी का ईलाज, और सम्पूर्ण टीकाकरण के माध्यम से नवजात /शिशु को जीवन रक्षण किया जा सकता हैं बच्चे के पोषण के अभाव से संक्रमण पर  NRC पर चर्चा करते हुए बताया गया की वहाँ पर एक Nutrsiyn, एक MBBS, एक MD dr. बाल चिकित्सक  होते हैं जिनकी निगरानी में NRC चलता हैं। जिसमें JSY के माध्यम से खाना मिलता हैं 14 दिन एडमिट रखते हैं। और उसके बाद 4 विजिट होती है बच्चे की स्तिस्थि में सुधार व् उपचार की स्थितियों की जानकारी लिया जाता है ।
वही जन्मे शिशु को किसी प्रकार की बीमारी/ समस्या होने पर लेवल- 2 स्वास्थ्य केंद्र में NBCC व लेबल 3 के FRU CHC में NBCC व NBSU तथा महिला जिला चिकिसालय में NBCC व NBSU व SNCU की सेवाएं हो तथा NBCC के अंतर्गत डॉक्टर स्टाफ नर्स को NSSK के तहत पूर्ण रूप से ट्रेनिंग मिला हो व NBSU की सेवा देने हेतु  मेडिकल ऑफिसर / बाल रोग विशेषज्ञ को F -IMNCI/ बच्चों की चिकित्सा हेतु  बाल चिकित्सक का प्रशिक्षण मिला हो 1 नर्सिंग स्टाफ Per shift  होंगी । कुल 4 नर्सिंग स्टाफ होंगे जिन्हें भी F-IMNCI में प्रशिक्षण मिला हो।  व SNCU सेवा देने हेतू 12-बेड हो जिसमें इकाई के लिए ( +4 बेड Step down area )में, जिसमें स्टाफ कार्यरत रहेंगे- स्टाफ नर्स: 10 बाल रोग विशेषज्ञ / मेडिकल ऑफिसर SNCU में  प्रशिक्षित हो तथा 3-4 (बाल रोग विशेषज्ञ / मेडिकल ऑफिसर और नर्स को FBNC में  प्रशिक्षित हो सहायक कर्मचारी: 4, 1 लैब टैक्नीशियन ( पार्ट टाइम) और 1 डेटा एंट्री ऑपरेटर तथा सभी लेवल में क्या उपकरण हो जिसे चित्र के माध्यम से दिखाया गया जैसे - BP  apparatus with stethoscope, sterilized intruments, radiant warmer, oxygen hood(neonatal), pediatric stethoscope etc. । तथा बीमार शिशु को नियमित मानक अनुसार सेवाएं मिले तो अर्ली नवजात शिशु मृत्यु, नवजात शिशु मृत्यु, बाल मृत्यु, मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है ।  
 IPHS मानक में  स्वास्थ्य संस्थान  की जनसंख्या आधारित ढांचा :- IPHS मानक अनुसार जिला चिकित्सालय 4 से 5 लाख की जनसंख्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 80000 से 120000 की जनसंख्या PHC 30000 जनसंख्या व उप स्वास्थ्य केंद्र 5000 की जनसंख्या  पर  बनना है ,  वही अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने हेतु IPHS मानक में कहीं उसका जिक्र नहीं दिया गया है ।
राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम :-  0 से 5 वर्ष का कोई भी बच्चा गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा रिफर पत्र लिखने के बाद मेडिकल कालेज में मुफ्त में इलाज कराया जा सकता है ।
हाइपोथर्मिया :- जब शिशु हाइपोथर्मिया  का शिकार होता है उसे  विटामिन K का इंजेक्शन लगता है जिसका लक्षण शिशु का शरीर नीला या पीला पड़ने लगता है ।
परिवार नियोजन :-  नियोजन के कई संसाधन हैं जिसके साथ साथ नसबंदी भी किया जाता है लेकिन परिवार नियोजन कभी शत प्रतिशत सफल नहीं होता है ।
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Friday, 9 June 2017

Meet the first Musahar community girl

       Congratulation to team of Shruti Nagvanshi and Ms. Parul Sharma ji. In 2005, PVCHR-Jan Mitra Nyas initiated breakfast project for education with support of Rajdulari Foundation and Parul Sharma of Sweden . Then Indo -German Society of Remschied, Germany established building for #ICDS center and one room in Primary Government School. Then Rekha received cycle for going college. Cycle supported by JMN-PVCHR with support of 200 Swedish donors and Parul Sharma.Now #CRY-JMN partnership adopted this village,so our associate Shobhnath is continually involved to motivate her. Yesterday Ms. Parul Sharma declared scholarship to Rekha for  further study.
From newspapers as follows:  
Shobhnath, a human rights activist working for the uplift of the community, said its a path breaking achievement.
"I know what difficulties Rekha faced to see this day. At a place where you have never seen people around you, people from your community study, it was natural that she opted out. But she sustained and has gained distinction no one in her community in the block, which has around 14 villages, has," said Shobhnath, associated with Jan Mitra Nyas.

http://indiatoday.intoday.in/story/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/1/975084.html
http://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/varanasi/allahabad/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/articleshowprint/59078297.cmshttp://www.financialexpress.com/india-news/up-board-class-x-result-meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-exam/710535/http://www.dnaindia.com/lifestyle/report-meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam-2467128http://indiatoday.intoday.in/story/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/1/975084.htmlhttp://indiatoday.intoday.in/story/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/1/975084.htmlhttp://www.newindianexpress.com/nation/2017/jun/09/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam-1614784.html
#pvchr #musahar #girlspower #u4humanrigh
 






Monday, 26 September 2016

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुपोषण जनित बीमारी से मौत


विषय : उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लाखापुर ग्राम में अठारह माह के बच्चे झिरू मुसहर की कुपोषण जनित बीमारी से मौत हो गयी, लाखापुर में अन्य कुपोषित बच्चों के समुचित पोषण एवं स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था में भारी कमी है, कृपया घटना को संज्ञान में लेकर उचित एवं आवश्यक कार्यवाही किया जाय |


महोदय/महोदया,

हम आपका ध्यान अठारह माह के मुसहर बच्चे की कुपोषण से मृत्यु के सन्दर्भ में आकृष्ट कराना चाहते हैं | उत्तर प्रदेश शासन द्वारा बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में कुपोषण दर में कमी लाने हेतु राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत कई विशेष कार्यक्रम संचालित किया गया है, बावजूद भी वंचित जातियों के बच्चे एवं महिलाओं की पहुंच योजनाओं तक नही है | अनुसूचित जाति का अठारह माह का कुपोषित बच्चा झिरू मुसहर जिसका वजन मात्र 5kg825grm था, ईलाज के दौरान मृत्यु हो गयी वह निमोनिया दस्त और बुखार से पिछले कई महीनों से पीड़ित था | उसके माता पिता ईट भठ्ठे पर काम करते हैं, बीमारी के लक्षणों पर आसपास के झोलाछाप डाक्टरों से झिरू का ईलाज करा रहे थे | लेकिन बच्चे की हालत में स्थाई सुधार नही देखकर ओझाई/झाड़फूंक भी कराते रहे, उन्हें लगता था कि बच्चे पर किसी ने भूत कर दिया है | माता पिता को झिरू के लगातार कम होते वजन और बिमार रहने से काफी चिंता बनी रहती थी | चूंकि दक्ष चिकित्सीय जाँच और परीक्षण व्यवस्था तक उनकी पहुंच नही थी सो बच्चे की बीमारी का ठीक ईलाज नही हो पा रहा था  |
घटना का संक्षिप्त विवरण
17 सितम्बर 2016, पं० दीनदयाल मंडलीय चिकित्सालय में ईलाज के लिए एडमिट किए जाने के समय में 18 माह के झिरू का वजन मात्र 5.825 किलोग्राम था, जबकि अगस्त 16 में उसका वजन 7 किलोग्राम था | मानवाधिकार जननिगरानी समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा ईट भठ्ठे पर जाकर अप्रैल माह में जब वजन किया गया था तब झिरू का वजन 9.100kg दर्ज किया गया था और वह सामान्य श्रेणी में था | जुलाई, 16 में झिरू का वजन लगभग 4 kg कम हो गया वजन मैपिंग में उसका वजन 5kg दर्ज किया गया | अप्रैल, के बाद झिरू को दस्त और बुखार की शिकायत हुई जिसका ईलाज उसके माता पिता भठ्ठे के करीब के दवाखाने से दवा करा रहे थे | लेकिन संक्रमण का उचित ईलाज नही होने के कारण झिरू को दस्त होते रहे और बुखार से भी पीड़ित रहा जो बीच-बीच में ठीक होकर पुन: दोहराव हो जाता था, जिससे उसका वजन लगातार गिरता रहा और इसी बीच वह निमोनिया से भी पीड़ित हो गया था | 1 अगस्त 2016 को RBSK टीम द्वारा लाखापुर मुसहर बस्ती में स्वास्थ्य कैम्प लगाया गया, चूँकि उस दिन बारिश हो रही था जिसके कारण  कैंप में मात्र 25% बच्चों का ही स्वास्थ्य परीक्षण हो पाया | जाँच में झिरु की हालत गंभीर बताई गई थी उसे NRC वाराणसी हेतु रिफर किया गया, मगर रेफरल प्रबंधन नहीं किया गया, जिससे झिरू NRC नही पहुंच पाया |
17 सितम्बर, 2016 को झिरू को पं० दीनदयाल मंडलीय चिकित्सालय में सांस लेने में तकलीफ बुखार और दस्त से पीड़ित होने कारण गम्भीर संक्रमण की अवस्था में उसके माता-पिता द्वारा समिति के कार्यकर्ताओं के सहयोग से एडमिट कराया गया | उस समय झिरू का वजन 5kg.825ग्राम था | झिरू निमोनिया और दस्त से पीड़ित होने के कारण बहुत ही गम्भीर अवस्था में दिखाई दे रहा था | उसकी हालत को देखते हुए NRC में लेने से इंकार कर दिया गया, लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता, मंगला प्रसाद द्वारा मुख्य चिकित्साधिकारी से मोबाइल पर शिकायत किए जाने के बाद उनके निर्देश पर पं० दीनदयाल मंडलीय चिकित्सालय में झिरू को भर्ती कर लिया गया | लेकिन बच्चों के लिए इंटेंसिव केयर की सुविधा नही उपलब्ध होने के कारण बच्चे को विशेष एवं आवश्यक देखभाल सेवाएं नही मिल पा रही थी | डाक्टरों द्वारा कई बार उन्हें BHU जाने का सुझाव दिया गया लेकिन परिवार ने असमर्थता जता दिया, जिससे पं० दीनदयाल में ही ईलाज चलता रहा | 20 सितम्बर, 16 को दिन में लगभग 11-12 के बीच बच्चे में कोई हरकत ना होता देखकर झिरू के माता पिता समझ गए की बच्चा अब जीवित नही है, धीरे से उसे चिकित्सालय से बिना किसी को बताए ही वापस घर आ गए | इस बीच चिकित्सालय से बाहर जाते देखकर वंहा नियुक्त सुरक्षा कर्मियों ने माता पिता से पूछा भी कि बच्चा ठीक है तो उन्होंने हाँ में उत्तर देकर निकल पड़े | उन्हें गलतफहमी थी की बच्चे की मृत्यु जाहिर करेंगे तो उसका पोस्मार्टम होगा जो उनके मान्यता के आधार पर ठीक नही होता है |
झिरू के परिवार की स्थिति -  
झिरू के पिता, राजकुमार मुसहर एवं माँ धर्मावती, निवासी ग्राम पंचायत खरावन लखापुर, मुसहर बस्ती, ईट भठ्ठा में मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं | इनके परिवार में कुल 2 व्यस्क (पति-पत्नी), एवं कुल 5 बच्चे (अतवारी, उम्र 12 वर्ष, रेखा, उम्र 10 वर्ष, वीरू, 5 वर्ष, झिरू, उम्र 18 माह(मृत), मुकेश, 2 माह) रहे, किन्तु उन्हें केवल तीन यूनिट का राशन मिलता है, उन्हें राशन का स्लिप भी नही मिला है, परिवार के पास कोई जाबकार्ड नही है और ना ही किसी प्रकार का स्वास्थ्य बीमा ही हुआ है |

लखापुर मुसहर बस्ती में पोषण योजना की स्थिति –
बस्ती में 0-5 वर्ष के 28 बच्चे थे, जिसमें वर्तमान समय में 56.25% बच्चे गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं | सितम्बर, 16 में मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा लखापुर के 27 बच्चों में 16 बच्चों का पोषण मैपिंग किया जा सका, तब झिरू सहित कुल 9 बच्चे, पारो, 2.3 माह वजन 8 kg, ऊदल, 4.2 माह, वजन 9 kg, शिवानी, 2.6 माह, वजन 7kg.900ग्राम, विजय, 3.10 माह, वजन 8kg.600ग्राम, अजय, 4.2 माह, वजन 10kg.200ग्राम, धीरज, 6 माह, वजन 4kg, अंश, 11 माह, वजन 5kg.100ग्राम, पंकज, 1.1 माह, वजन 6.kg300ग्राम, गम्भीर कुपोषणग्रस्त अवस्था में पाए गए | जुलाई माह में समिति द्वारा 16 बच्चों के पोषण मैपिंग में 12 SAM बच्चे एवं 4 MAM बच्चे यानि 75% बच्चे कुपोषित चिन्हित किए गये | जिनकी सूचि बनाकर चिकित्सा प्रभारी बडागांव को देकर स्वास्थ्य कैम्प की मांग किया गया |
इस सन्दर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार के 22 दिसम्बर, 2004 के शासनादेश जिसमें भूख और कुपोषण से राहत के लिए आर्थिक सहायता का प्राविधान है, इस सन्दर्भ में प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल- समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली ऊ०प्र०(सन्दर्भ संख्या-: 40019716002190) पर जिलाधिकारी महोदय वाराणसी को 16 अगस्त 16 को पंचायत निधि से एक हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रति कुपोषित बच्चों के परिवार को खानपान हेतु दिलाने का मांग किया गया, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुआ |
अप्रैल, 16 में चंदन ईट उधोग, गजापुर, वाराणसी पर जंहा इनके अभिभावक ईट बनाने का काम कर रहे थे, मानवाधिकार जननिगरानी समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा भठ्ठे पर जाकर बच्चों का पोषण मैपिंग किया गया | जिसमें 46.66% बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार मिले | जिसकी सूची बनाकर स्वास्थ्य कैंप लगाने हेतु लिखित पत्र प्रभारी चिकित्साधिकारी, बड़ागांव, वाराणसी को दिया गया, किन्तु भठ्ठे पर स्वास्थ्य कैंप नहीं लगा | |

लखापुर में ICDS सेवाओं की स्थिति -
लखापुर मुसहर बस्ती के 0–6 वर्ष के बच्चे सरोज देवी के मिनी आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े हैं जो, बस्ती से लगभग 500 मीटर दूर प्राथमिक विद्यालय में अन्य 2 आंगनबाड़ी केन्द्रों भी प्राथमिक विद्यालय में ही संचालित होते है | मुसहर बस्ती के बच्चे गर्भवती एवं धात्री महिलाएं सरकारी अभिलेखों में सम्भवतः पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं पाते होंगे, लेकिन वास्तव में उन्हें ICDS केंद्र से सेवाएं नही मिलने की शिकायत है | RBSK द्वारा पोषण मैपिंग के दौरान 9 कुपोषित बच्चे दर्ज किए गए लेकिन ICDS के रजिस्टर में केवल 4 गम्भीर कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए हैं, किन्तु किसी बच्चे को गर्म पका पोषणयुक्त भोजन नही दिया जाता है | हौसला पोषण मिशन के अधीन केवल 4 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया है, लेकिन किसी महिला को हौसला पोषण मिशन के अधीन गर्म पका हुआ खाना नही मिलता है | जबकि सूत्रों के अनुसार संयुक्त बैंक खाते से 2000 रूपये की राशि खानपान हेतु निकाली गयी है किन्तु किसी भी महिला को पका हुआ खाना नही दिया गया है | केंद्र में सहायिका की नियुक्ति नही है, अत: बच्चों को केंद्र पर बुलाने कोई नही जाता है, इस स्थिति में जितने बच्चे केंद्र में पहुंच जाते हैं, वे पोषाहार लेकर वापस चले आते हैं | उन्हें पूर्व प्राथमिक शिक्षा नही दिया जाता है, बच्चों को बैठने के लिए दरी या टाटपट्टी नही है पोषाहार की बोरियों को सिलकर उनके बैठने की व्यवस्था की गयी है | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती रजिस्टर पर सभी कार्य भली भांति निपटा देती हैं | पोषाहार खाने और पकाने का बर्तन कार्यकर्ती के घर पर रखा हुआ है, पोषाहार खाने के लिए बच्चे अपने घर से बर्तन लाते हैं जिसे बिना धुले उसी में पोषाहार या हाटकुक बच्चे खा लेते हैं | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा बच्चों को पोषण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सबंधी अच्छे व्यवहारों का विकास नही किया जाता हैं |
लखापुर मुसहर बस्ती में खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की स्थिति - 
वाराणसी जिले के बड़ागांव विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खरावन,  ग्राम लाखापुर मुसहर बस्ती में कुल 26 मुसहर परिवार निवास करते हैं | जिनके आजीविका का कोई स्थाई संसाधन नहीं है, आजीविका कमाने के लिए मुसहर परिवार ईट भट्ठों पर ईट पथाई का काम करते हैं | ईट पथाई के काम में मुसहर परिवारों को अधिकांश मालिकों द्वारा एडवांश देकर कराया जाता है, जिसके बदले न्यूनतम मजदूरी भी नही दिया जाता है | उनके अशिक्षा का फायदा उठाकर हिसाब-किताब में उनकी मजदूरी भी मार दिए जाने की घटनाएं प्रकाश में आती हैं | बारिश के मौसम में लगभग सभी परिवार पंजाब चले जाते हैं, जंहा कटाई के बाद खेतों में गिरा हुआ अनाज बटोरकर इकठ्ठा करते हैं | यह काम लगभग एक महीने का होता है जिससे उन्हें लगभग 10 हजार की कमाई हो जाती है, जो उनके द्वारा कमाई न होने के समय में लिए गए कर्जो को चुकाने के काम आता है |
26 मुसहर परिवारों में केवल 4 परिवारों को सरकारी आवास योजना के तहत आवास मिल पाया है | शेष 22 परिवार प्लास्टिक की पन्नी से छांव बनाकर अपने परिवार सहित रहते हैं, जिससे सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम का प्रभाव परिवार के सभी सदस्यों को झेलना पड़ता है |
NFSA के बाद कोटेदार द्वारा 20 परिवारों को राशन तो दिया जाता है, लेकिन राशन स्लिप पर यूनिट कम दर्ज किया गया है, अत: परिवारों को यूनिट से कम राशन मिलता है | बस्ती में सभी प्रसव घरेलू होते हैं, जबकि उपस्वास्थ्य केंद्र बस्ती से करीब 900 मीटर की दुरी पर है, जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है, जिस पर गाँव के कतिपय लोगों का अवैध कब्जा है | ANM बहनजी द्वारा अगस्त, 16 में पहली बार शिकायत किए जाने पर मुसहर महिलाओं का टीकाकरण किया | किसी महिला को ANC–PNC की सेवाएं नही मिलती हैं | मुसहर सहित अन्य जातियों की महिलाएं भी सुरसत्ती दाई से घरेलू प्रसव कराती हैं |
लखापुर मुसहर परिवारों के बच्चों में कुपोषण दर कम करने और उन्हें मौत से बचाने एवं स्वस्थ्य स्तर को बेहतर बनाने के लिए निम्नवत सघन प्रयास किए जाने चाहिए -
1.    लखापुर, मुसहर बस्ती के चिन्हित कुपोषित बच्चों को अविलम्ब भूख और कुपोषण से मुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, के 22 दिसम्बर, 2004 के शासनादेश के अनुसार प्रति बच्चे को एक हजार रूपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाए |
2.    राशनकार्ड से वंचित 6 परिवारों को NFSA से जोड़ते हुए अविलम्ब राशनकार्ड दिया जाए |
3.    राशन स्लिप में दर्ज कम यूनिट संख्या की जाँच करके परिवार संख्या के आधार दस्तावेजों को ठीक कराते हुए, यूनिट के आधार पर राशन दिया जाए, जिससे वास्तविक रूप में परिवारों की खाद्य सुरक्षा सुनिशिचित हो |
4.    मिनी आंगनबाड़ी केंद्र द्वारा मुसहर परिवारों को दी जा रही सेवाओं का आडिट किया जाए एवं प्रकाश में आयी कमियों एवं चुनौतियों के अनुरूप कार्ययोजना बनाई जाए, जिससे बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को सभी 6 सेवाएं बिना अवरोध के प्राप्त हो सकें |
5.    स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा संस्थागत प्रसवों को प्रोत्साहन दिया जाए यह जाँच का विषय है की आज भी लखापुर में मुसहर सहित अन्य महिलाएं भी घरेलू प्रसव कराती हैं |
6.    मुसहर परिवारों का अविलम्ब स्वास्थ्य बीमा नि:शुल्क कराया जाए |
7.    मुसहर परिवारों का जाबकार्ड बनवाकर उन्हें अविलम्ब मनरेगा से जोड़ा जाए |
8.    ईट बनाने के काम में दक्ष मुसहर परिवारों का प्रवास रोकने के लिए उनके निवास स्थान पर लधु उधोग की ईकाई (ईट निर्माण) स्थापित किया जाए |
9.    इन परिवारों को समाजवादी पेंशन योजना से जोड़ा जाए |


भवदीया
श्रुति नागवंशी
मैनेजिंग ट्रस्टी
मानवाधिकार जननिगरानी समिति
सा 4/2 ए, दौलतपुर, वाराणसी
+91-9935599330/1