Friday, 9 June 2017

Meet the first Musahar community girl

       Congratulation to team of Shruti Nagvanshi and Ms. Parul Sharma ji. In 2005, PVCHR-Jan Mitra Nyas initiated breakfast project for education with support of Rajdulari Foundation and Parul Sharma of Sweden . Then Indo -German Society of Remschied, Germany established building for #ICDS center and one room in Primary Government School. Then Rekha received cycle for going college. Cycle supported by JMN-PVCHR with support of 200 Swedish donors and Parul Sharma.Now #CRY-JMN partnership adopted this village,so our associate Shobhnath is continually involved to motivate her. Yesterday Ms. Parul Sharma declared scholarship to Rekha for  further study.
From newspapers as follows:  
Shobhnath, a human rights activist working for the uplift of the community, said its a path breaking achievement.
"I know what difficulties Rekha faced to see this day. At a place where you have never seen people around you, people from your community study, it was natural that she opted out. But she sustained and has gained distinction no one in her community in the block, which has around 14 villages, has," said Shobhnath, associated with Jan Mitra Nyas.

http://indiatoday.intoday.in/story/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/1/975084.html
http://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/varanasi/allahabad/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/articleshowprint/59078297.cmshttp://www.financialexpress.com/india-news/up-board-class-x-result-meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-exam/710535/http://www.dnaindia.com/lifestyle/report-meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam-2467128http://indiatoday.intoday.in/story/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/1/975084.htmlhttp://indiatoday.intoday.in/story/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam/1/975084.htmlhttp://www.newindianexpress.com/nation/2017/jun/09/meet-the-first-musahar-community-girl-to-clear-class-x-exam-1614784.html
#pvchr #musahar #girlspower #u4humanrigh
 






Monday, 26 September 2016

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुपोषण जनित बीमारी से मौत


विषय : उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लाखापुर ग्राम में अठारह माह के बच्चे झिरू मुसहर की कुपोषण जनित बीमारी से मौत हो गयी, लाखापुर में अन्य कुपोषित बच्चों के समुचित पोषण एवं स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था में भारी कमी है, कृपया घटना को संज्ञान में लेकर उचित एवं आवश्यक कार्यवाही किया जाय |


महोदय/महोदया,

हम आपका ध्यान अठारह माह के मुसहर बच्चे की कुपोषण से मृत्यु के सन्दर्भ में आकृष्ट कराना चाहते हैं | उत्तर प्रदेश शासन द्वारा बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में कुपोषण दर में कमी लाने हेतु राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत कई विशेष कार्यक्रम संचालित किया गया है, बावजूद भी वंचित जातियों के बच्चे एवं महिलाओं की पहुंच योजनाओं तक नही है | अनुसूचित जाति का अठारह माह का कुपोषित बच्चा झिरू मुसहर जिसका वजन मात्र 5kg825grm था, ईलाज के दौरान मृत्यु हो गयी वह निमोनिया दस्त और बुखार से पिछले कई महीनों से पीड़ित था | उसके माता पिता ईट भठ्ठे पर काम करते हैं, बीमारी के लक्षणों पर आसपास के झोलाछाप डाक्टरों से झिरू का ईलाज करा रहे थे | लेकिन बच्चे की हालत में स्थाई सुधार नही देखकर ओझाई/झाड़फूंक भी कराते रहे, उन्हें लगता था कि बच्चे पर किसी ने भूत कर दिया है | माता पिता को झिरू के लगातार कम होते वजन और बिमार रहने से काफी चिंता बनी रहती थी | चूंकि दक्ष चिकित्सीय जाँच और परीक्षण व्यवस्था तक उनकी पहुंच नही थी सो बच्चे की बीमारी का ठीक ईलाज नही हो पा रहा था  |
घटना का संक्षिप्त विवरण
17 सितम्बर 2016, पं० दीनदयाल मंडलीय चिकित्सालय में ईलाज के लिए एडमिट किए जाने के समय में 18 माह के झिरू का वजन मात्र 5.825 किलोग्राम था, जबकि अगस्त 16 में उसका वजन 7 किलोग्राम था | मानवाधिकार जननिगरानी समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा ईट भठ्ठे पर जाकर अप्रैल माह में जब वजन किया गया था तब झिरू का वजन 9.100kg दर्ज किया गया था और वह सामान्य श्रेणी में था | जुलाई, 16 में झिरू का वजन लगभग 4 kg कम हो गया वजन मैपिंग में उसका वजन 5kg दर्ज किया गया | अप्रैल, के बाद झिरू को दस्त और बुखार की शिकायत हुई जिसका ईलाज उसके माता पिता भठ्ठे के करीब के दवाखाने से दवा करा रहे थे | लेकिन संक्रमण का उचित ईलाज नही होने के कारण झिरू को दस्त होते रहे और बुखार से भी पीड़ित रहा जो बीच-बीच में ठीक होकर पुन: दोहराव हो जाता था, जिससे उसका वजन लगातार गिरता रहा और इसी बीच वह निमोनिया से भी पीड़ित हो गया था | 1 अगस्त 2016 को RBSK टीम द्वारा लाखापुर मुसहर बस्ती में स्वास्थ्य कैम्प लगाया गया, चूँकि उस दिन बारिश हो रही था जिसके कारण  कैंप में मात्र 25% बच्चों का ही स्वास्थ्य परीक्षण हो पाया | जाँच में झिरु की हालत गंभीर बताई गई थी उसे NRC वाराणसी हेतु रिफर किया गया, मगर रेफरल प्रबंधन नहीं किया गया, जिससे झिरू NRC नही पहुंच पाया |
17 सितम्बर, 2016 को झिरू को पं० दीनदयाल मंडलीय चिकित्सालय में सांस लेने में तकलीफ बुखार और दस्त से पीड़ित होने कारण गम्भीर संक्रमण की अवस्था में उसके माता-पिता द्वारा समिति के कार्यकर्ताओं के सहयोग से एडमिट कराया गया | उस समय झिरू का वजन 5kg.825ग्राम था | झिरू निमोनिया और दस्त से पीड़ित होने के कारण बहुत ही गम्भीर अवस्था में दिखाई दे रहा था | उसकी हालत को देखते हुए NRC में लेने से इंकार कर दिया गया, लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता, मंगला प्रसाद द्वारा मुख्य चिकित्साधिकारी से मोबाइल पर शिकायत किए जाने के बाद उनके निर्देश पर पं० दीनदयाल मंडलीय चिकित्सालय में झिरू को भर्ती कर लिया गया | लेकिन बच्चों के लिए इंटेंसिव केयर की सुविधा नही उपलब्ध होने के कारण बच्चे को विशेष एवं आवश्यक देखभाल सेवाएं नही मिल पा रही थी | डाक्टरों द्वारा कई बार उन्हें BHU जाने का सुझाव दिया गया लेकिन परिवार ने असमर्थता जता दिया, जिससे पं० दीनदयाल में ही ईलाज चलता रहा | 20 सितम्बर, 16 को दिन में लगभग 11-12 के बीच बच्चे में कोई हरकत ना होता देखकर झिरू के माता पिता समझ गए की बच्चा अब जीवित नही है, धीरे से उसे चिकित्सालय से बिना किसी को बताए ही वापस घर आ गए | इस बीच चिकित्सालय से बाहर जाते देखकर वंहा नियुक्त सुरक्षा कर्मियों ने माता पिता से पूछा भी कि बच्चा ठीक है तो उन्होंने हाँ में उत्तर देकर निकल पड़े | उन्हें गलतफहमी थी की बच्चे की मृत्यु जाहिर करेंगे तो उसका पोस्मार्टम होगा जो उनके मान्यता के आधार पर ठीक नही होता है |
झिरू के परिवार की स्थिति -  
झिरू के पिता, राजकुमार मुसहर एवं माँ धर्मावती, निवासी ग्राम पंचायत खरावन लखापुर, मुसहर बस्ती, ईट भठ्ठा में मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं | इनके परिवार में कुल 2 व्यस्क (पति-पत्नी), एवं कुल 5 बच्चे (अतवारी, उम्र 12 वर्ष, रेखा, उम्र 10 वर्ष, वीरू, 5 वर्ष, झिरू, उम्र 18 माह(मृत), मुकेश, 2 माह) रहे, किन्तु उन्हें केवल तीन यूनिट का राशन मिलता है, उन्हें राशन का स्लिप भी नही मिला है, परिवार के पास कोई जाबकार्ड नही है और ना ही किसी प्रकार का स्वास्थ्य बीमा ही हुआ है |

लखापुर मुसहर बस्ती में पोषण योजना की स्थिति –
बस्ती में 0-5 वर्ष के 28 बच्चे थे, जिसमें वर्तमान समय में 56.25% बच्चे गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं | सितम्बर, 16 में मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा लखापुर के 27 बच्चों में 16 बच्चों का पोषण मैपिंग किया जा सका, तब झिरू सहित कुल 9 बच्चे, पारो, 2.3 माह वजन 8 kg, ऊदल, 4.2 माह, वजन 9 kg, शिवानी, 2.6 माह, वजन 7kg.900ग्राम, विजय, 3.10 माह, वजन 8kg.600ग्राम, अजय, 4.2 माह, वजन 10kg.200ग्राम, धीरज, 6 माह, वजन 4kg, अंश, 11 माह, वजन 5kg.100ग्राम, पंकज, 1.1 माह, वजन 6.kg300ग्राम, गम्भीर कुपोषणग्रस्त अवस्था में पाए गए | जुलाई माह में समिति द्वारा 16 बच्चों के पोषण मैपिंग में 12 SAM बच्चे एवं 4 MAM बच्चे यानि 75% बच्चे कुपोषित चिन्हित किए गये | जिनकी सूचि बनाकर चिकित्सा प्रभारी बडागांव को देकर स्वास्थ्य कैम्प की मांग किया गया |
इस सन्दर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार के 22 दिसम्बर, 2004 के शासनादेश जिसमें भूख और कुपोषण से राहत के लिए आर्थिक सहायता का प्राविधान है, इस सन्दर्भ में प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल- समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली ऊ०प्र०(सन्दर्भ संख्या-: 40019716002190) पर जिलाधिकारी महोदय वाराणसी को 16 अगस्त 16 को पंचायत निधि से एक हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रति कुपोषित बच्चों के परिवार को खानपान हेतु दिलाने का मांग किया गया, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुआ |
अप्रैल, 16 में चंदन ईट उधोग, गजापुर, वाराणसी पर जंहा इनके अभिभावक ईट बनाने का काम कर रहे थे, मानवाधिकार जननिगरानी समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा भठ्ठे पर जाकर बच्चों का पोषण मैपिंग किया गया | जिसमें 46.66% बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार मिले | जिसकी सूची बनाकर स्वास्थ्य कैंप लगाने हेतु लिखित पत्र प्रभारी चिकित्साधिकारी, बड़ागांव, वाराणसी को दिया गया, किन्तु भठ्ठे पर स्वास्थ्य कैंप नहीं लगा | |

लखापुर में ICDS सेवाओं की स्थिति -
लखापुर मुसहर बस्ती के 0–6 वर्ष के बच्चे सरोज देवी के मिनी आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े हैं जो, बस्ती से लगभग 500 मीटर दूर प्राथमिक विद्यालय में अन्य 2 आंगनबाड़ी केन्द्रों भी प्राथमिक विद्यालय में ही संचालित होते है | मुसहर बस्ती के बच्चे गर्भवती एवं धात्री महिलाएं सरकारी अभिलेखों में सम्भवतः पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं पाते होंगे, लेकिन वास्तव में उन्हें ICDS केंद्र से सेवाएं नही मिलने की शिकायत है | RBSK द्वारा पोषण मैपिंग के दौरान 9 कुपोषित बच्चे दर्ज किए गए लेकिन ICDS के रजिस्टर में केवल 4 गम्भीर कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए हैं, किन्तु किसी बच्चे को गर्म पका पोषणयुक्त भोजन नही दिया जाता है | हौसला पोषण मिशन के अधीन केवल 4 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया है, लेकिन किसी महिला को हौसला पोषण मिशन के अधीन गर्म पका हुआ खाना नही मिलता है | जबकि सूत्रों के अनुसार संयुक्त बैंक खाते से 2000 रूपये की राशि खानपान हेतु निकाली गयी है किन्तु किसी भी महिला को पका हुआ खाना नही दिया गया है | केंद्र में सहायिका की नियुक्ति नही है, अत: बच्चों को केंद्र पर बुलाने कोई नही जाता है, इस स्थिति में जितने बच्चे केंद्र में पहुंच जाते हैं, वे पोषाहार लेकर वापस चले आते हैं | उन्हें पूर्व प्राथमिक शिक्षा नही दिया जाता है, बच्चों को बैठने के लिए दरी या टाटपट्टी नही है पोषाहार की बोरियों को सिलकर उनके बैठने की व्यवस्था की गयी है | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती रजिस्टर पर सभी कार्य भली भांति निपटा देती हैं | पोषाहार खाने और पकाने का बर्तन कार्यकर्ती के घर पर रखा हुआ है, पोषाहार खाने के लिए बच्चे अपने घर से बर्तन लाते हैं जिसे बिना धुले उसी में पोषाहार या हाटकुक बच्चे खा लेते हैं | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा बच्चों को पोषण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सबंधी अच्छे व्यवहारों का विकास नही किया जाता हैं |
लखापुर मुसहर बस्ती में खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की स्थिति - 
वाराणसी जिले के बड़ागांव विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खरावन,  ग्राम लाखापुर मुसहर बस्ती में कुल 26 मुसहर परिवार निवास करते हैं | जिनके आजीविका का कोई स्थाई संसाधन नहीं है, आजीविका कमाने के लिए मुसहर परिवार ईट भट्ठों पर ईट पथाई का काम करते हैं | ईट पथाई के काम में मुसहर परिवारों को अधिकांश मालिकों द्वारा एडवांश देकर कराया जाता है, जिसके बदले न्यूनतम मजदूरी भी नही दिया जाता है | उनके अशिक्षा का फायदा उठाकर हिसाब-किताब में उनकी मजदूरी भी मार दिए जाने की घटनाएं प्रकाश में आती हैं | बारिश के मौसम में लगभग सभी परिवार पंजाब चले जाते हैं, जंहा कटाई के बाद खेतों में गिरा हुआ अनाज बटोरकर इकठ्ठा करते हैं | यह काम लगभग एक महीने का होता है जिससे उन्हें लगभग 10 हजार की कमाई हो जाती है, जो उनके द्वारा कमाई न होने के समय में लिए गए कर्जो को चुकाने के काम आता है |
26 मुसहर परिवारों में केवल 4 परिवारों को सरकारी आवास योजना के तहत आवास मिल पाया है | शेष 22 परिवार प्लास्टिक की पन्नी से छांव बनाकर अपने परिवार सहित रहते हैं, जिससे सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम का प्रभाव परिवार के सभी सदस्यों को झेलना पड़ता है |
NFSA के बाद कोटेदार द्वारा 20 परिवारों को राशन तो दिया जाता है, लेकिन राशन स्लिप पर यूनिट कम दर्ज किया गया है, अत: परिवारों को यूनिट से कम राशन मिलता है | बस्ती में सभी प्रसव घरेलू होते हैं, जबकि उपस्वास्थ्य केंद्र बस्ती से करीब 900 मीटर की दुरी पर है, जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है, जिस पर गाँव के कतिपय लोगों का अवैध कब्जा है | ANM बहनजी द्वारा अगस्त, 16 में पहली बार शिकायत किए जाने पर मुसहर महिलाओं का टीकाकरण किया | किसी महिला को ANC–PNC की सेवाएं नही मिलती हैं | मुसहर सहित अन्य जातियों की महिलाएं भी सुरसत्ती दाई से घरेलू प्रसव कराती हैं |
लखापुर मुसहर परिवारों के बच्चों में कुपोषण दर कम करने और उन्हें मौत से बचाने एवं स्वस्थ्य स्तर को बेहतर बनाने के लिए निम्नवत सघन प्रयास किए जाने चाहिए -
1.    लखापुर, मुसहर बस्ती के चिन्हित कुपोषित बच्चों को अविलम्ब भूख और कुपोषण से मुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, के 22 दिसम्बर, 2004 के शासनादेश के अनुसार प्रति बच्चे को एक हजार रूपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाए |
2.    राशनकार्ड से वंचित 6 परिवारों को NFSA से जोड़ते हुए अविलम्ब राशनकार्ड दिया जाए |
3.    राशन स्लिप में दर्ज कम यूनिट संख्या की जाँच करके परिवार संख्या के आधार दस्तावेजों को ठीक कराते हुए, यूनिट के आधार पर राशन दिया जाए, जिससे वास्तविक रूप में परिवारों की खाद्य सुरक्षा सुनिशिचित हो |
4.    मिनी आंगनबाड़ी केंद्र द्वारा मुसहर परिवारों को दी जा रही सेवाओं का आडिट किया जाए एवं प्रकाश में आयी कमियों एवं चुनौतियों के अनुरूप कार्ययोजना बनाई जाए, जिससे बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को सभी 6 सेवाएं बिना अवरोध के प्राप्त हो सकें |
5.    स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा संस्थागत प्रसवों को प्रोत्साहन दिया जाए यह जाँच का विषय है की आज भी लखापुर में मुसहर सहित अन्य महिलाएं भी घरेलू प्रसव कराती हैं |
6.    मुसहर परिवारों का अविलम्ब स्वास्थ्य बीमा नि:शुल्क कराया जाए |
7.    मुसहर परिवारों का जाबकार्ड बनवाकर उन्हें अविलम्ब मनरेगा से जोड़ा जाए |
8.    ईट बनाने के काम में दक्ष मुसहर परिवारों का प्रवास रोकने के लिए उनके निवास स्थान पर लधु उधोग की ईकाई (ईट निर्माण) स्थापित किया जाए |
9.    इन परिवारों को समाजवादी पेंशन योजना से जोड़ा जाए |


भवदीया
श्रुति नागवंशी
मैनेजिंग ट्रस्टी
मानवाधिकार जननिगरानी समिति
सा 4/2 ए, दौलतपुर, वाराणसी
+91-9935599330/1














Monday, 1 August 2016

आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं संसाधनों की उपलब्धता की अध्ययन रिपोर्ट

सेवा में
श्रीमान् मुख्य विकास अधिकारी
वाराणसी उत्तर प्रदेश |

विषय- आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं संसाधनों की उपलब्धता के सन्दर्भ में 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों का अध्ययन रिपोर्ट एवं गुणवत्ता सुधार के सन्दर्भ में |
महोदय ,
            जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा वाराणसी के 4 ब्लाक (हरहुआ, बडागांव, पिंडरा, अराजीलाईन) एक एवं शहरी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र बजरडीहा के 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दी जा रही गुणवत्तापूर्ण सेवाओं एवं संसाधनो की उपलब्धता का एक संक्षिप्त अध्ययन किया गया है | अध्ययन प्रश्नावली महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दी जा रही मानक सूचकांक सेवाओं एवं गुणवत्ता को केंद्र रखकर बनाया गया है | अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र में जंहा एक तरफ गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच का प्रतिशत कुछ बेहतर दिखाई दे रहा है, वंही केन्द्रों में बुनियादी संसाधनो का बड़े स्तर पर आभाव है | इन बुनियादी संसाधनो के आभाव में हम बेहतर परिणाम की अपेक्षा नही किया जा सकता है | यह भी विचारणीय बिन्दु है कि जब वाराणसी के सिर्फ 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति चिंताजनक जन्हा बुनियादी संसाधनों का आभाव है तो कई सौ अन्य आंगनबाड़ी की स्थिति कैसी होगा और इन नाममात्र की सेवाओं के आधार पर बच्चों में कुपोषण कितना दूर हो पायेगा |
संसाधनों के अभावों के दृष्टिगत निम्न बिंदु ---------
1. अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के बैठने के लिए दरी, टाटपट्टी, चटाई आदि की व्यवस्था की किया जाना चाहिए | इनके अभाव में बच्चे पोषाहार की बोरियों पर बैठाए जाते हैं |
2. अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के लिए खाना पकाने के बर्तन उपलब्ध नही हैं, जिसके अभाव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती अपने घर से खाना पका कर लाती हैं या खाना पकाने के लिए अपने नीजी बर्तनो का प्रयोग करतीं हैं | अत: विभाग द्वारा उन केन्दों पर बर्तनों की व्यवस्था की जानी चाहिए |
3. इसी प्रकार बच्चों को पोषाहार या पका हुआ खाना खाने के लिए अधिकांश केन्द्रों पर बर्तन कटोरी आदि की व्यवस्था नही है | कुछ केन्द्रों में टिफिन है लेकिन वह भी केन्द्र में नामाकिंत कुल बच्चों की संख्या के अनुसार नही है, ऐसी अवस्था में कार्यकर्ती उन टिफिन का भी प्रयोग नही कर पातीं हैं | अत: सभी केन्द्रों में बच्चों को खाने के लिए उपयुक्त आवश्यक संख्या में बर्तनों की व्यवस्था किया जाना चाहिए | अन्यथा विभाग द्वारा दिए जा रहे पोषाहार के दुरूपयोग को कम करते हुए बच्चों में पोषण स्तर का सुधार नही किया जाना व्यवहारिक नही है |
 4. इसी प्रकार केन्द्रों में आने वाले बच्चे पीने के पानी के लिए हैण्डपाइप के पानी का ही प्रयोग कर पाते हैं क्योंकि ग्राम स्तर पर दूसरा कोई विकल्प नही है, अत: समय - समय पर विभागीय प्रयास से उन हैण्डपाइपो के जल शुद्धता को मापा जाना चाहिए |
5. रिपोर्ट में जिन 14 केन्द्रों पर वजन मशीन उपलब्ध नही है उनमें वजन मशीन उपलब्ध कराया जाए, इसी प्रकार जिन केन्द्रों पर ग्रोथ चार्ट नही है वंहा ग्रोथ चार्ट उपलब्ध कराया जाए |
6. अधिकांश (30) केन्द्रों पर बच्चों की लम्बाई नापने के लिए टेप, एवं बांह नापने हेतु टेप की व्यवस्था किया जाना चाहिए जिससे बच्चों के सम्पूर्ण विकास को मापा जा सके |
7. जिन 21 आंगनबाड़ी केंद्र में रेफरल पर्ची नही वंहा रेफरल पर्ची की व्यवस्था अविलम्ब किया जाना चाहिए |
8. 33 आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के साफ सफाई और स्वच्छता व्यवहार के दृष्टिकोण से प्रयोग में आने वाले तौलिया, साबुन, शीशा, आदि की कोई व्यवस्था नही है | अत: स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम में बच्चों के स्वच्छता व्यवहार के लिए भी कार्यक्रम और बजट की व्यवस्था किया जाना चाहिए |
9. इसी प्रकार आंगनबाड़ी केन्द्रों का स्वयं का भवन नही होने से वे शौचालय विहीन भी हैं और साथ ही भोजन पकाने के लिए कक्ष नही है | इस अवस्था में गुणवत्तापूर्ण सेवाओं को उपलब्ध करा पाना एक बड़ी चुनौती है |
10. आंगनबाड़ी कार्यकर्तीयों द्वारा प्री प्राइमरी किट का प्रयोग भी नही होता दिखाई पड़ता है, क्योंकि  लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ती प्रतिदिन अपने रजिस्टर ही भरते दिखाई देती हैं | उनके पास समय शेष उपलब्ध नही होता कि वे बच्चों के साथ शैक्षिक प्रक्रिया संचालित करें |
11. इसी प्रकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा के सन्दर्भ में संचालित प्रक्रियाएं केवल रजिस्टर तक ही सिमित होते है यदि लाभार्थी समूह में इन सेवाओं की उपलब्धता का आंकलन विभाग द्वारा किया जाएगा तो स्वत: ही स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी | ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के दिन भी केवल टीकाकरण कार्यक्रम तक ही सिमित रह जाता है किन्तु रिपोर्ट और रजिस्टर में सभी सेवाएँ मानक और विभागीय निर्देशों के अनुरूप संचालित किए जाते हैं |

अत: श्रीमान जी से निवेदन है कि इस मामले को संज्ञान में लेते हुए इन बच्चों के लिए icds की सेवाये व कुपोषित बच्चों कि उचित देखभाल के लिए कार्यवाही करने कि कृपा करे  |

                                                       श्रुति

                                                        ( मैनेजिंग ट्रस्टी )
 ( मानवाधिकार जननिगरानी समिति )

                                                         मो. 09935599330



आंगनबाड़ी सेवाओं में गुणवत्ता पंहुच एवं संसाधनों की उपलब्धता की धरातलीय स्थिति

 बाल अधिकार के सरंक्षण एवं संबर्धन के उद्देश्य से मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा बाल अधिकार परियोजना क्षेत्र के 4 ब्लाक (बडागांव, पिंडरा, हरहुआ, अराजीलाइन ) व 1 शहरी क्षेत्र बजरडीहा में संचालित 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों में सेवाओं व संसाधनों की उपलब्धता की धरातलीय स्थिति  अध्ययन किया गया |
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, एवं विकास के उद्देश्य से समेकित बाल विकास योजना (ICDS) के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता, पंहुच, और संसाधनो की उपलब्धता की धरातलीय स्थिति की जानकारी के दृष्टिकोण से अध्ययन किया गया, जिससे धरातलीय स्थिति से अवगत होकर सेवाओं में गुणवत्ता सुधार एंव लाभार्धियो की पहुँच सेवाओं तक सुनिश्चित हो सके |
अध्ययन की प्रक्रिया – अध्ययन के एक चरण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती से केंद्र में संसाधनों की उपलब्धता के सन्दर्भ में प्रश्न पूछे गये एवं  दूसरे चरण में कार्यकर्ताओं द्वारा केन्द्रों का अवलोकन के आधार पर रिपोर्ट तैयार किया गया है | यह अध्ययन 34  आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के साथ किया गया है |
आंगनबाड़ी केंद्र की प्राथमिक सूचनाएं –
वाराणसी जिले के 4 ब्लाक व 1 शहरी बस्ती के आंगनवाडी केन्द्रों की प्रारम्भिक सूचानाये ( जनवरी 2016 )  :-

आंगनवाडी की  संख्या  
0-6 माह के कुल बच्चें

7 माह से 3 वर्ष के बच्चें

3 वर्ष से 6 वर्ष के कुल बच्चे
कुल किशोरी बालिकाये
कुल गर्भवती महिलाये
कुल धात्री माताये

कुल कुपोषित बच्चें
(SAM+MAM)

34
385
1729
1591
2399
313
375
299

आंगनबाड़ी केंद्र में संसाधनों की उपलब्धता – आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह से संसाधनो के आभाव में संचालित हैं, संसाधन विहीन केंद्र किस प्रकार बच्चों एवं महिलाओं के पोषण स्वास्थ्य एवं विकास में सहायक होंगे जब वे खुद ही संसाधन रूपी पोषण के आभाव में कुपोषण से ग्रस्त हैं जिसका विवरण निम्न है |
1-      
  आंगनवाडी केन्द्र संचालन स्थल :- वाराणसी के 4 ब्लाक (बडागांव, पिंडरा, हरहुआ, अराजीलाइन ) व 1 शहरी क्षेत्र बजरडीहा में संचालित 34 आंगनबाड़ी केन्द्रों में केवल 7 केन्द्र विभागीय भवन में संचालित है, 4 केन्द्र पंचायत भवन में संचालित , 7 किराए के मकान में संचालित होता है | विपरीत परिस्थिति में ऐसे 8 केन्द्र संचालित है जो खुले जगह में चलता है ऐसे परिस्थितियों में कैसे बच्चे गर्मी सर्दी व जाड़े के मौसम में बैठते है |
  आंगनवाडी केन्द्र में बच्चों की बैठने की व्यवस्था :- परियोजना क्षेत्र में कुल 31 केन्द्रों में खुलने के समय देखा गया | 28 केन्द्रों में बच्चे पोषाहार की प्लास्टिक की बोरी पर बैठते है | 3 केन्द्रों पर बच्चे विभाग द्वारा दी गयी टाटपट्टी पर बैठते है और जिलाधिकारी महोदय के गोद लेने के बाद 2 केन्द्र ग्राम- आयर, ख़ास हरहुआ पर HDFC बैंक द्वारा दिया गया कुर्सी टेबल पर बैठते है और 1 केन्द्र ग्राम आयर मुसहर बस्ती हरहुआ पर 2008 में जनमित्र न्यस द्वारा दी गयी कुसी मेज पर बैठते है |

केन्द्र पर हाटकुक पकाने के लिए बर्तन की व्यवस्था :-  आंगनवाडी कार्यकत्री द्वारा केवल 9 ICDS केन्द्रों पर हाटकुक पकाने के लिए बर्तन की व्यवस्था  की होने की बात बतायी गयी  शेष 25 केन्द्रों पर बर्तन की कोई व्यवस्था नहीं है इन केन्द्रों पर आंगनवाडी कार्यकत्री अपने घर से हाटकुक पका कर लाती है या केन्द्र पर अपना निजी बर्तन का उपयोग करती है जो की व्यवहारिक नही है की इससे बच्चों को समुचित मात्रा में पोषाहार मिलता होगा | कार्यकत्री से पूछने से पता हुआ की विभाग द्वारा हम लोग को कोई बर्तन नहीं दिया गया है |

 
जिन केन्द्रों पर बर्तन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

कुआर
सुशीला देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी

दल्लीपुर
रीता देवी

रमईपुर
राजकुमारी

सराय मुग़ल
प्रेमलता

रमईपट्टी
गायत्री देवी

खरुआपर
विजय लक्ष्मी

रायतारा
अनीता देवी

मिराशाह
मीना कुमारी

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

भैठौली
शिप्रा सिंह

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय

पुआरी खुर्द
दुर्गावती देवी
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )

बजरडीहा
ज्योति मिश्रा

बजरडीहा
ममता मिश्र
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी

4-      पोषाहार खाने का बर्तन बच्चों की संख्या अनुसार :- 11 केन्द्रों पर बच्चों को हाट्कुक  खाने के लिए बर्तन की कोई भी व्यवस्था नहीं है | जब की 23 केन्द्रों पर बच्चों के लिए तो टिफिन है लेकिन बच्चों के संख्या अनुसार नहीं है कार्यकत्री इसका उपयोग नहीं करती है | इन केंद्र पर बच्चे कटोरी या थाली लेकर पोषाहार की आस में अपने घर से निकलते हैं यह मानवीय गरिमा को ठेस पहुचाने वाला व्यवहार है |



जिन केन्द्रों पर बच्चों के खाने के लिए बर्तन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

कुआर
सुशीला देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc

आयर
पूनम जायसवाल

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

भैठौली
शिप्रा सिंह

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )
 बच्चों के लिए पीने का पानी की व्यवस्था :- आंगनवाडी केन्द्रों में स्वच्छ पीने का पानी किसी भी केन्द्र पर नहीं है | 26 ऐसे केन्द्र है जँहा पर बच्चे हैण्डपम्प से पानी पीते है और केवल 2 ऐसे केन्द्र है जँहा पर HDFC बैंक द्वारा RO लगवाया गया है विदित हो कि आयर गाँव को  माननीय जिलाधिकारी महोदय द्वारा गोद लिया गया है | इसी तरह 2 केन्द्रों पर बच्चे ट्यूबेल पर जाकर पानी पीते है और 1 केन्द्र पर कार्यकत्री कुए से पानी लाकर बच्चों को पिलाती है और एक ऐसा केन्द्र है जो हरहुआ ब्लाक के पुआरी खुर्द ककरही व खसेरा चमार बस्ती के पंचायत भवन में संचालित केन्द्र जँहा पर बच्चों के लिए पानी पीने कि कोई व्यवस्था नहीं है |
6-      वजन नापने का मशीन :- बच्चों का वजन नापने के लिए केवल 20 केन्द्रों पर मशीन उपलब्ध है और सही अवस्था में है शेष 14 केन्द्रों पर मशीन खराब होने के कारण उपयोग में नहीं लाया जाता है | ऐसी अवस्था में बच्चो का वजन किस प्रकार सम्भव है किस प्रकार कार्यकर्ती बच्चों का ग्रोथ चार्ट बनाकर बच्चों के पोषण विकास की निगरानी करतीं हैं |
जिन केन्द्रों पर वजन मशीन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc

रमईपट्टी
उषा देवी

रमईपट्टी
गायत्री देवी

आयर
पूनम जायसवाल

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

भैठौली
शिप्रा सिंह

पुआरी खुर्द
श्रुति
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc

रमईपट्टी
उषा देवी












7-      बच्चों का ग्रोथ चार्ट ( प्रत्येक बच्चें का ) :- विभाग द्वारा यह एक अच्छा पहल है की प्रत्येक बच्चों का ग्रोथ चार्ट 30 केन्द्रों पर है केवल 4 ऐसे केन्द्र है जिनके पास ग्रोथ चार्ट नहीं है वह रजिस्टर पर दर्ज करती है |
जिन केन्द्रों पर ग्रोथ चार्ट उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc







8-      बच्चों की लम्बाई नापने हेतु टेप :- बच्चों की लम्बाई नापने के लिए सिर्फ 4 केन्द्रों पर टेप है शेष 30  केन्द्रों पर टेप है ही नहीं | इसी तरह बच्चों के बाह नापने हेतु मानक टेप भी केवल 3 केन्द्रों पर है | यह एक बड़ा प्रश्न है कि जिन केन्द्रों पर वजन नापने की मशीन, लम्बाई नापने का टेप व बाह नापने का टेप न हो उस केन्द्र के बच्चों का कैसे पोषण मैपिंग का निर्धारण होता होगा |
जिन केन्द्रों लम्बाई नापने हेतु टेप उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी

सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा

कुआर
सुशीला देवी

छिरिया
संजू देवी

छिरिया
संजू देवी inc
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी

दल्लीपुर
रीता देवी

रमईपुर
राजकुमारी

रमईपट्टी
उषा देवी

सराय मुग़ल
प्रेमलता

रमईपट्टी
गायत्री देवी

खरुआपर
विजय लक्ष्मी

रायतारा
अनीता देवी

मिराशाह
मीना कुमारी
हरहुआ
आयर
संजू यादव

आयर
पूनम जायसवाल

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय

पुआरी खुर्द
श्रुति

पुआरी खुर्द
दुर्गावती देवी
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )

बजरडीहा
ममता मिश्र
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी

परमन्दापुर
गीतादेवी

सजोई
पुष्पा देवी




























9-      बच्चों की संदर्भन पर्ची ( रेफरल / पीली पर्ची  ):-  रेफरल की स्थिति भी चिंताजनक है | 13 केन्द्रों पर ही रेफरल पर्ची उपलब्ध है शेष 21 केन्द्रों पर रेफरल पर्ची नहीं है

जिन केन्द्रों पर रेफरल / पीली पर्ची  उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
 बडागांव
सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा

छिरिया
संजू देवी inc
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी

दल्लीपुर
रीता देवी

रमईपुर
राजकुमारी

सराय मुग़ल
प्रेमलता

रमईपट्टी
गायत्री देवी

रायतारा
अनीता देवी
हरहुआ
आयर
संजू यादव

आयर
उर्मिला सिंह

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )

बजरडीहा
ममता मिश्र
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह

पुआरी कला
मंसा देवी

पुआरी कला
शीला देवी

परमन्दापुर
गीतादेवी

सजोई
पुष्पा देवी

10-   मेडिसिन किट :- मेडिसिन किट के मामले में विभाग द्वारा यह अच्छा पहल है कि कुल 32 केन्द्रों पर बच्चों के प्राथमिक उपचार हेतु दवा उपलब्ध है केवल 2 ऐसे केन्द्र है जँहा पर किसी भी प्रकार का दवा नहीं है |
जिन केन्द्रों पर मेडिसिन उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
 बडागांव
छिरिया
संजू देवी  ( इन्चार्ज )

आयर
पूनम जायसवाल






11-   पेट के कीड़े मारने की गोली , आयरन की गोली :- विभाग द्वारा यह भी एक अच्छा पहल है कि कुल 31 केन्द्रों पर पेट के कीड़े मारने की गोली , आयरन की गोली उपलब्ध है शेष 3 केन्द्र ऐसा है जँहा पर यह गोली नहीं है वह 3 केन्द्र यह है |
जिन केन्द्रों पर पेट के कीड़े मारने की गोली , आयरन की गोली उपलब्ध नहीं है
ब्लाक
पता
कार्यकत्री का नाम
 बडागांव
छिरिया
संजू देवी inc

रमईपुर
राजकुमारी

आयर
पूनम जायसवाल
12-   तौलिया , साबुन ,आईना बच्चों के प्रयोग हेतु :- केवल 1 केन्द्रों प्राथमिक विद्यालय रमईपट्टी पिंडरा में संचालित उषादेवी के केन्द्र पर बच्चों के स्वच्छता के मामले पर तौलिया, साबुन, आईना उपलब्ध है शेष 33 केन्द्रों पर इस तरह की व्यवस्था नहीं है | जिससे बच्चों में साफ सफाई के प्रति चेतना पैदा किया जा सके |
13-    बच्चों के लिए शौचालय अलग-अलग :- 34 केन्द्रों में से मात्र एक केन्द्र पर शौचालय की व्यवस्था नही है केवल 1 केन्द्र प्राथमिक विद्यालय रमईपट्टी पिंडरा में संचालित उषादेवी के केन्द्र पर  शौचालय की व्यवस्था है |
14-    भोजन पकाने का कक्ष :- 4 केन्द्रों पर भोजन पकाने के लिए कक्ष है शेष 30 केन्द्रों पर कोई व्यवस्था नहीं है | इन केन्द्रों पर कार्यकत्री अपने घर से भोजन पका कर लाती है |
15-   प्री प्रामारी किट :-  बच्चों को स्कूल पूर्व “पूर्व प्राथमिक शिक्षा” के लिए अक्षर शब्द गीत कविता कहानी आदि कुल 30 केन्द्रों पर रखा है लेकिन इसका उपयोग कार्यकत्री नहीं करती है | बाकि 4 केन्द्रों पर यह सामाग्री है ही नहीं |
16-   पोषण एंव स्वास्थ्य शिक्षण सामाग्री :- महिलायों और किशोरियों के बीच बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य के लिए शिक्षा कार्यक्रम की सन्दर्भ सामग्री 26 केन्द्रों पर है और 8 केन्द्रों पर इस तरह की सामाग्री नहीं है एक तरफ लाभार्थी समुदाय के पास अपेक्षित और आवश्यक जानकारियां नही हैं तो दूसरी तरफ सेवा प्रदाताओं द्वारा कमजोर और एवं आधी अधूरी प्रकिया के कारण अति वंचित समुदायों के बीच कुपोषण, रुग्णता, शिशु बाल व मात्री मृत्यु दरों में कमी कैसे लायी जाएगी तथा लाभार्थी को जानकारी दिए जाने कि प्रक्रिया कैसे संचालित की जाती है |

17-   बच्चों के मध्यान भोजन का मीनू ( दीवाल लेखन ) :- 13 आंगनवाडी केन्द्रों पर मध्यान भोजन का मीनू लिखा है और 21 केन्द्रों में कुछ भी नहीं लिखा है |



18-   ग्राम स्वास्थ्य व पोषण दिवस :- विभाग की यह एक अच्छी पहल है की सभी केन्द्रों पर ग्राम स्वास्थ्य व पोषण दिवस मनाया जाता है |


आंगनवाडी केन्द्र का भ्रमण रिपोर्ट  
हरहुआ ब्लाक अंतर्गत आयर ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थति
वाराणसी जिले के हरहुआ ब्लाक अंतर्गत ग्राम आयर जिसमे कुपोषण उन्मूलन करने के लक्ष्य से जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा गोद लिया गया है |
1-        आयर ग्राम के नई बस्ती का आंगनबाड़ी केंद्र सब्जी मण्डी के करीब कृषि विभाग के कमरे में संचालित है | केंद्र में 0 – 6 माह के कुल 11 बच्चे, 7 माह से 3 वर्ष के कुल 58 बच्चे एवं 3 – 6 वर्ष के कुल 56 बच्चे नामांकित हैं सर्वे के अनुसार 66 किशोरियां, 12 गर्भवती महिलाएं, 11 धात्री महिलाएं तथा कुल 4 कुपोषित बच्चों की पहचान किया गया है | बजट के आभाव में हाट्कुक नियमित नही बनता है, कार्यकर्ती द्वारा गृह भ्रमण नही किया जाता है ना ही माताओं को स्वास्थ्य पोषण सम्बन्धी जानकारी दिया जाता है | प्रत्येक टीकाकरण के दिन लाभार्थी महिलाएं मण्डी परिषद के टिन शेड में इकठ्ठा होती हैं, लेकिन उन्हें पोषाहार देकर वापस कर दिया जाता है | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा कुपोषित बच्चों की पहचान वास्तविक रूप में नही की जाती है उनके द्वारा हमेशा ही कम से कम संख्या में बच्चों की पहचान करके रजिस्टर में केवल दर्ज कर लिया जाता है | कुपोषण से पीड़ित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र से प्राप्त सेवाओं एवं रेफरल सेवाओं की कोई जानकारी दी जाती है | जिसे पूर्व में कई बच्चे मृत्यु का शिकार भी हो गए हैं | जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा मार्च माह में बच्चों के वजन मैपिंग में कुल 13 कुपोषित बच्चों में 4 गम्भीर और 9 आंशिक कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है | 
2-       आयर ग्राम के मुस्लिम एवं चमार बस्ती के लिए आंगनबाड़ी केंद्र II, III वर्तमान में संकुल के भवन में एक साथ संचालित है, II की आंगनबाड़ी कार्यकर्ती किरन सिंह की बीमारी से मृत्यु हो जाने के कारण की मृत्यु के कारण III केंद्र से जोड़ दिया गया है जो उर्मिला सिंह द्वारा संचालित है | केंद्र में बच्चों का नामांकन तो अधिक है लेकिन बच्चों की उपस्थिति 10 से 12 की संख्या में ही रहता है | पोषाहार तो दिया जाता है लेकिन उसके खाने के लिए कोई सुझाव नही दिया जाता है | खास बस्ती में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े बच्चे की वजन मैपिंग में 23 कुपोषित बच्चे जिसमें  से 2 गम्भीर हैं और 21 आंशिक कुपोषित बच्चे हैं |
3-       आयर ग्राम के मुसहर बस्ती के लिए आंगनवाडी केन्द्र वर्तमान में जनमित्र न्यास संस्था के भवन में संचालित है यह केन्द्र पूनम जयसवाल व सहायिका सरिता देवी चलाती है | केंद्र में 0 – 6 माह के कुल 13 बच्चे, 7 माह से 3 वर्ष के कुल 58   बच्चे एवं 3 – 6 वर्ष के कुल 54 बच्चे नामांकित हैं सर्वे के अनुसार 22 किशोरियां, 8 गर्भवती महिलाएं, 13  धात्री महिलाएं तथा कुल 5 कुपोषित बच्चों की पहचान किया गया है | बजट के आभाव में हाट्कुक नियमित नही बनता है,कार्यकत्री पूनम जयसवाल केन्द्र पर नियमित नहीं आती केन्द्र सहायिका द्वारा ही चलता है और गृह भ्रमण भी कभी नहीं करती तथा गर्भवती महिला धात्री महिला व किशोरियों को पोषण सम्बंधित सुझाव नहीं देती है | कुपोषित बच्चों के मिलकर कभी भी पोषण स्वास्थ्य स्वच्छता के मुद्दे पर कोई सलाह नहीं देती | मातृ समिति की बैठक भी कभी नहीं होती |आयर ग्राम के मुसहर बस्ती में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा कुल 5 कुपोषित बच्चों की संख्या बताई गई, जबकि ठीक उसी समय जनमित्र न्यास की टीम द्वारा बच्चों का मैपिंग किया तो कुल 14 कुपोषित बच्चे मिले जिसमें से 5 अति गम्भीर और 9 आंशिक कुपोषित बच्चे रहे |   
हरहुआ ब्लाक अंतर्गत पुआरी खुर्द ग्राम

4-       पुआरी खुर्द ग्राम की ककरही व खसेहरा चमार बस्ती के लिए आंगनबाड़ी केंद्र लाभार्थी बच्चों के घर से 1.5 किमी दूरी पर संचालित है, जिसे बच्चे दूरी और खराब रास्ता होने के कारण केंद्र पर नही जा पाते हैं जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ती रास्ता खराब होने के ही कारण से बस्ती में नही आती हैं यह विचार करने की बात है कि, जब कार्यकर्ती व्यस्क होते हुए कार्यक्षेत्र में आने में अक्षम हैं तो बच्चे  केंद्र पर कैसे जा सकेंगे | बताया जाता है कि हाट्कुक बजट के आभाव में नियमित नही मिलता है, पीने के पानी की कुछ व्यवस्था नही है | 
पिंडरा ब्लाक अंतर्गत दल्लीपुर ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थति

5-       ग्राम पंचायत दल्लीपुर ग्राम मारूकडीह आंगनबाड़ी केन्द्र - पश्चिमपट्टी में चौरा माता मंन्दिर के सामने खुले  आसमान में पेड़ के नीचे संचालित होता हैं | जहॉ पर आगनबाड़ी कार्यकर्ती रीता देवी व सहायिका शीला देवी कार्यरत हैं आंगनबाड़ी केंद्र पर सहायिका केवल आस पास के बच्चों को बुलाकर लाती हैं लेकिन वही मारूकडीह मुसहर बस्ती की दूरी 1.5km होने के कारण मुसहर परिवार बच्चों के पहुच से दूर हैं इसलिए वे बच्चे आंगनबाड़ी की सेवा से वंचित रह जाते हैं केंद्र में 0-6 माह के 14 बच्चे ,7 माह से 3 वर्ष के 60 बच्चें  ,3-6 वर्ष के 45 बच्चे, कुल किशोरियॉ 75 ,कुल गर्भवती 4 ,कुल धात्री माता 14, और कुल कुपोषित बच्चें 3 पजीकृत हैं | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती मारूकडीह के बच्चों का आकडा़ अधूरा दर्ज की हैं | आंगनबाड़ी कार्यकर्ती मात्री समिति का गठन नही की हैं ना ही उन्हें इस सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी हैं | इस केंद्र पर 15-20  बच्चों की उपस्थिति होती हैं जिनके बैठने के लिए पोषाहार की बोरियां सीलकर टाट वनाया गया हैं | यहॉ पर पोषाहार पकाने का बर्तन नही मिला हैं अपने निजी बैगुना व अन्य बर्तन में भोजन पकाती हैं | पोषाहार खाने का बर्तन 25 कटोरी मिला हैं जो की बच्चों की संख्या के अनुसार कम हैं लेकिन कटोरी बच्चों के उपयोग में नही हैं बच्चे घर से बर्तन लेकर आते हैं | पेयजल का साधन हैण्डपम्प हैं | यहॉ पर ट्रे, शाल्टर व बडी़ मशीन दोनों उपलब्ध हैं जो की ठीक स्थिति में हैं | ग्रोथ चार्ट प्रत्येक बच्चे का हैं भरा जाता हैं ,बच्चों की बाह नापने व लम्बाई नापने हेतु टेप उपलब्ध नही हैं पीली/ रेफरल पर्ची नही हैं | मेडिसीन किट, पेट में कीड़े मारने व आयरन की गोली मिला हैं तौलिया, साबुन, आईना, नही मिला हैं ,शौचालय व भोजन पकाने का कक्ष नहीं हैं भोजन आगनबाड़ी कार्यकर्ती अपने घर से बनवाकर लाती हैं | प्री प्राइमरी किट रंग,फल,फुल,जानवर,सब्जी,आकार,आदि चार्ट एव स्लेट पेन्सिल कविता कहानी की पुस्तकें है लेकिन आगनबाड़ी का भवन न होने के कारण चार्ट रखा पड़ा हैं केवल पुस्तक व स्लेट बच्चो के उपयोग में हैं | पोषण व स्वास्थ्य शिक्षण सामग्री पोस्टर चार्ट , फ्लिप बुक हैं | केंद्र खुले आसमान के नीचे संचालित होने के कारण बच्चों के मध्याह्न भोजन का मीनू दिवाल लेखन नहीं हैं | ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस दूसरे बुधवार को होता हैं |


6-       यह आगनवाड़ी केंद्र मिराशाह फकीर बस्ती में किराये के मकान में संचालित होता हैं । केंद्र में 0 – 6 माह के कुल 11 बच्चे, 7 माह से 3 वर्ष के कुल 52 बच्चे एवं 3 – 6 वर्ष के कुल 50 बच्चे नामांकित हैं सर्वे के अनुसार 4 गर्भवती महिलाएं, 11 धात्री महिलाएं तथा कुल 9  कुपोषित बच्चों की पहचान किया गया है | जबकि ठीक उसी समय जनमित्र न्यास की टीम द्वारा बच्चों का मैपिंग किया तो कुल 17 कुपोषित बच्चे मिले जिसमें से 8 अति गम्भीर और 9 आंशिक कुपोषित बच्चे रहे |   इस केन्द्र पर बच्चे पोषाहार की बोरी पर बैठते है | हाट्कुक बनाने की कोई भी व्यवस्था नहीं है | बच्चों की लम्बाई व बाह नापने के लिए टेप नहीं है | मध्याह्न भोजन का मीनू दिवाल लेखन नहीं हैं |  

बडागांव ब्लाक अंतर्गत खरावन ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थति


7-       खरावन लाखापुर मुसहर बस्ती के मिनी आंगनवाड़ी का सर्वे रिपोर्ट - इस आंगनवाड़ी केंद्र को संचालित करने हेतु शासकीय भवन नही है यहा का आंगनवाड़ी केंद्र परियोजना क्षेत्र के बाहर लगभग 500 मीटर दूर प्राथमिक विद्यालय खरावन बड़ागाँव वाराणसी में संचालित होता है इस प्राथमिक विद्यालय में कुल 03 आंगनवाड़ी केंद्र को संचालित होता है, यहा की आंगनवाड़ी कार्यकर्ती सरोजा देवी है । जिनके पास सहायिका नही है जो बच्चों को कभी बुलाकर केंद्र पर नही लाती है । यह आगनवाड़ी केंद्र पर अनियमित समय लगभग 10:00 बजे आती है तथा अनियमित समय लगभग 01:00 बजे तक केंद्र में रहती है । इनके केंद्र में पूर्व प्राथमिक ( 03-06 वर्ष ) के 34 बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र पंजीकृत है जिसमे से 3-4 बच्चे ही पुष्टाहार लेकर कुछ ही समय में वापस घर चले जाते है जिसके बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ती सरोजा देवी है दूसरे आंगनवाड़ी कार्यकर्ती के साथ बैठ कर घरेलू बात ( गप-सप ) करती है । पूर्व प्राथमिक के बच्चों को बैठने के लिये पुष्टाहार की खाली फ़टी गन्दी बोरियां सिलकर टाट-पट्टी बनाकर बच्चों को बैठाती है । आंगनवाड़ी कार्यकर्ती अपने कुर्सी पर बैठकर रजिस्टर में लिखने-पढ़ने ( बच्चों को बुलाने, गृह भरमण, स्वस्थ्य सलाह ) का सब काम कर डालती है । जिस काम में लिये केंद्र में रहती है वहा का कोई काम नही करती यहाँ तक की बच्चों की उपस्थित बच्चो कभी नाम बोलकर नही दर्ज नही करती । इस केंद्र में किसी प्रकार का कोई साबुन, तौलिया, कंघी, शीशा नही है बच्चे घर से साफ सुथरा आते है घर वापस गंदे होकर यहा से जाते है । बच्चों को खाने-पिने के लिये 10 गिलास, 08 टिफिन 01 कुकर है जिसे वह अपने घर में रखी है उसका अपने घर के उपयोग में लाती है, केंद्र में बच्चे केंद्र में बच्चे से 03 वर्ष के 35 बच्चे पंजीकृत है जिनमे से 00-05 वर्ष के 05 गंभीर, 18 आंशिक कुपोषण के शिकार व 49 सामान्य बच्चे है । इन सभी पात्र किशोरी, गर्भवती, धात्री एवं  07 माह से 03 वर्ष के बच्चों को शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक माह में 03 दिन निर्धारित दिनांक 05-15-25 को पुष्टाहार वितरण कर उसे खाने की विधियों की जानकारी देना व उनके अभ्यास में लाना है । लेकिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ती उपरोक्त पात्र बच्चों एव महिलाओ को किसी-किसी माह में 1-2 बार अपने घर से बर्तन लाते है तो उसमे अपना हार्डकुकड / पुष्टाहार बिना बर्तन को धोये उसी में हार्डकुकड / पुष्टाहार बच्चे खाते है । इस केंद्र में किसी प्रकार का कोई साबुन, तौलिया, कंघी, शीशा नही है बच्चे घर से साफ-सुथरे केंद्र पर आते है गंदे होकर वापस घर जाते हैं । इनके यहा छोटा-बड़ा मिलाकर 05 वजन मशीन है मगर सभी खराब होकर बंद पड़ा है जब इस वजन अभियान में बच्चों का वजन करना पड़ा तो दूसरे केंद्र से वजन मशीन लेकर अपने बच्चों का वजन की है ।






34 आंगनवाडी केन्द्रों की सूची
विकासखण्ड
ग्राम पंचायत
कार्यकत्री नाम  का नाम
संचालन स्थल





1
बडागांव
लखमीपुर
सोना देवी
कार्यकत्री के घर
2

सोबरना नट बस्ती
प्रीति शर्मा
खुला जगह
3

कुआर
सुशीला देवी
पंचायत भवन
4

छिरिया
संजू देवी
विभागीय भवन
5

छिरिया
संजू देवी इन्चार्ज
विभागीय भवन
6
पिंडरा
राजेतारा
रीना देवी
खुला जगह
7

दल्लीपुर
रीता देवी
धार्मिक स्थल
8

रमईपुर
राजकुमारी
किराए के भवन
9

रमईपट्टी
उषा देवी
विभागीय भवन
10

सराय मुग़ल
प्रेमलता
खुला जगह
11

रमईपट्टी
गायत्री देवी
पंचायत भवन
12

खरुआपर
विजय लक्ष्मी
विभागीय भवन
13

रायतारा
अनीता देवी
खुला जगह
14

मिराशाह
मीना कुमारी
किराए के भवन
15
हरहुआ
आयर
संजू यादव
विभागीय भवन
16

आयर
पूनम जायसवाल
JMN भवन
17

आयर
उर्मिला सिंह
विभागीय भवन
18

आयर
उर्मिला सिंह (चार्ज )
विभागीय भवन
19

भैठौली
शिप्रा सिंह
प्राधान जी के घर
20

पुआरी खुर्द
मीरा श्रीवास्तव
पंचायत भवन
21

पुआरी खुर्द
अंजू प्रभा
दुसरे के घर में
22

पुआरी खुर्द
उर्मिला पाण्डेय
खुला जगह
23

पुआरी खुर्द
श्रुति
दुसरे के घर में
24

पुआरी खुर्द
दुर्गावती देवी
प्राथमिक विद्यालय
25
बजरडीहा
बजरडीहा
हंसा देवी ( चार्ज में )
किराए के भवन
26

बजरडीहा
ज्योति मिश्रा
किराए के भवन
27

बजरडीहा
ममता मिश्र
किराए के भवन
28
हरहुआ
पुआरी कला
पुष्पा सिंह
खुला जगह
29

पुआरी कला
मंसा देवी
किराए के भवन
30

पुआरी कला
शीला देवी
खुला जगह
31
अराजीलाइन
परमन्दापुर
विन्दवासनी
पंचायत भवन
32

परमन्दापुर
सुनीता देवी
प्राथमिक विद्यालय
33

परमन्दापुर
गीतादेवी
किराए के भवन
34

सजोई
पुष्पा देवी
खुला जगह